बिहार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में 1076 पदों पर बहाली का बड़ा अपडेट सामने आया है। शुक्रवार को पटना में मंत्री जमा खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बिहार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अलग-अलग श्रेणियों के पदों पर भर्ती होगी। क्या होगा, कब होगा, कहां होगा, कौन करेगा और क्यों जरूरी है—इन सभी सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के हर प्रखंड में प्रखंड अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी तैनात किए जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया बीपीएससी और बीएसएससी के जरिए पूरी की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यक समुदाय तक समय पर और प्रभावी तरीके से पहुंचे। इस फैसले से लोगों को स्थानीय स्तर पर सीधी सहायता मिलने की उम्मीद है।
1076 पदों पर होगी नियुक्ति
विभाग के अनुसार कुल 1076 पदों पर बहाली की तैयारी है। इन पदों का ब्यौरा संबंधित आयोगों को भेज दिया गया है।
पदों का विवरण इस प्रकार है:
- जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी – 6 पद
- प्रखंड अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी – 487 पद
- निम्नवर्गीय लिपिक (मुख्यालय/निदेशालय) – 8 पद
- निम्नवर्गीय लिपिक (क्षेत्रीय संवर्ग) – 14 पद
- निम्नवर्गीय लिपिक (समाहरणालय संवर्ग) – 524 पद
- छात्रावास प्रबंधक – 37 पद
सबसे अधिक 524 पद निम्नवर्गीय लिपिक के हैं। इससे प्रशासनिक ढांचा मजबूत करने की कोशिश दिखती है।
हर प्रखंड में एक अधिकारी की तैनाती
सरकार की योजना है कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक प्रखंड अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी की नियुक्ति की जाए।
इससे योजनाओं की निगरानी स्थानीय स्तर पर होगी। लाभार्थियों को जिला मुख्यालय तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
इस फैसले से लोगों को सीधे ब्लॉक स्तर पर मार्गदर्शन और सहायता मिलेगी। खासकर छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, छात्रावास और अन्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
शिक्षा क्षेत्र में बड़े कदम
मंत्री ने बताया कि विभाग शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार कर रहा है।
कक्षा 9 से 12 तक के 22 अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय अलग-अलग जिलों में बनाए जा रहे हैं। फिलहाल दरभंगा और किशनगंज में दो विद्यालय संचालित हैं।
अप्रैल तक कटिहार, जमुई, कैमूर, नालंदा और मुजफ्फरपुर में पांच और स्कूल तैयार हो जाएंगे। इसके बाद कुल संख्या सात हो जाएगी।
सरकार की योजना है कि भविष्य में हर जिले में अल्पसंख्यक आवासीय कल्याण विद्यालय स्थापित किया जाए।
मदरसों में स्मार्ट क्लास और तकनीकी कोर्स
राज्य के 75 मदरसों में स्मार्ट क्लास शुरू हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि सभी मदरसों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
साथ ही रोजगार उन्मुख व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से अनुदानित 9 मदरसों और मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय में एक केंद्र स्थापित किया जा रहा है। कुल 10 सेंटर में से 5 में तकनीकी कोर्स चलेंगे।
इस पहल से छात्रों को आधुनिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
सामाजिक योजनाएं और अन्य पहल
मंत्री ने बताया कि तलाकशुदा महिलाओं को 25 हजार रुपये की सहायता देने की योजना जारी है।
राज्य में नौ हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी की जा चुकी है। वक्फ बोर्ड की जमीन की पहचान कर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
इन कदमों का उद्देश्य सामुदायिक ढांचे को मजबूत करना और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बजट में बड़ा इजाफा
विभाग के सचिव ने बताया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट लगातार बढ़ा है।
2005-06 में विभाग का बजट 3 करोड़ 53 लाख रुपये था। 2024-25 में यह बढ़कर 728 करोड़ रुपये हो गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट 1041 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब तक 77 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है।
बजट वृद्धि से स्पष्ट है कि सरकार इस क्षेत्र पर अधिक संसाधन खर्च कर रही है।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
यह बहाली और नई पहलें सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं हैं।
अगर हर प्रखंड में अधिकारी तैनात होते हैं, तो छात्रों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
इस फैसले से लोगों को स्थानीय स्तर पर समाधान मिलेगा। शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर बढ़ सकते हैं।
हालांकि, अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है।
Source: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान की प्रेस कॉन्फ्रेंस
