बिहार में HIV मरीजों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। मंगलवार को विधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यह जानकारी दी। क्या हुआ, कब खुलासा हुआ, कहां हालात गंभीर हैं, कौन प्रभावित है, क्यों संक्रमण बढ़ रहा है और सरकार कैसे रोकथाम कर रही है—इन सवालों के बीच HIV मरीजों का आंकड़ा 1,00,044 बताया गया। पटना, गया समेत 13 जिलों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत मानी जा रही है।
सदन में उठा HIV का मुद्दा
विधान परिषद में डॉ. राजवर्धन आजाद सहित नौ पार्षदों ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए यह मुद्दा उठाया।
उन्होंने संक्रमण की रोकथाम और इलाज की व्यवस्था पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में 1 लाख 44 लोग HIV पॉजिटिव दर्ज हैं।
सरकार ने इसे चुनौतीपूर्ण स्थिति मानते हुए रोकथाम और जागरूकता पर जोर देने की बात कही।
13 जिले ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 13 जिलों में संक्रमण की दर ज्यादा है।
राजधानी पटना इस सूची में सबसे ऊपर है।
पटना में अब तक 8270 मरीजों की पुष्टि हुई है।
दूसरे स्थान पर गया जिला है, जहां 5760 HIV संक्रमित पाए गए हैं।
किन जिलों में कितने मरीज?
सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:
- पटना – 8270
- गया – 5760
- मुजफ्फरपुर – 5520
- सीतामढ़ी – 5026
- बेगूसराय – 4716
- भागलपुर – 3078
अन्य जिलों में भी संक्रमण के मामले दर्ज हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में जागरूकता के बावजूद संक्रमण दर चिंता का विषय है।
जांच और उपचार की व्यवस्था
राज्य में 196 समेकित परामर्श और जांच केंद्र (ICTC) संचालित हैं।
इन केंद्रों पर HIV की मुफ्त जांच और परामर्श सुविधा उपलब्ध है।
सरकार का दावा है कि मरीजों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) भी उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रशासन का फोकस है कि ज्यादा से ज्यादा लोग समय पर जांच कराएं और इलाज शुरू करें।
‘बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना’
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि संक्रमित व्यक्तियों को सामाजिक और आर्थिक सहयोग देने के लिए ‘बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना’ चलाई जा रही है।
इसके तहत प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को 1500 रुपये प्रतिमाह सहायता मिलती है।
18 वर्ष से कम उम्र के दो आश्रित बच्चों को 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 63.81 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।
आम जनता के लिए क्यों अहम है यह आंकड़ा?
HIV केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती भी है।
समय पर जांच और इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
इस फैसले से लोगों को मुफ्त जांच और आर्थिक सहायता का लाभ मिल रहा है, जो बड़ी राहत है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देना सबसे जरूरी है।
संक्रमण रोकने के लिए क्या जरूरी?
- नियमित जांच
- सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार
- जागरूकता अभियान
- कलंक और भेदभाव से बचाव
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संक्रमण रोकने के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद जरूरी है।
आगे की रणनीति
सरकार ने सदन में आश्वस्त किया कि HIV उन्मूलन के लिए प्रयास तेज किए जाएंगे।
हाई रिस्क जिलों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी है।
स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाए जाएंगे।
निष्कर्ष
बिहार में HIV मरीजों की संख्या का एक लाख पार पहुंचना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी संकेत है।
पटना और गया समेत 13 जिलों में स्थिति ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।
सरकार जांच, उपचार और आर्थिक सहायता की व्यवस्था कर रही है, लेकिन संक्रमण रोकने में समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले समय में यह देखना होगा कि जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संक्रमण दर में कितनी कमी आती है।
Source: बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री का बयान
