Bharat Bandh 12 February 2026: ट्रेड यूनियनों का देशव्यापी बंद, पटना में दिखा असर

 भारत-अमेरिका ट्रेड डील, केंद्र की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी 2026 को भारत बंद का आह्वान किया। कई बैंक यूनियन भी हड़ताल में शामिल रहीं। पटना समेत कई शहरों में प्रदर्शन और बैंकों पर बंद का असर देखने को मिला।


10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भारत बंद

देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal), केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में आज भारत बंद बुलाया।

इस बंद को INTUC, AITUC, CITU, HMS समेत कई राष्ट्रीय संगठनों का समर्थन मिला। बैंकिंग सेक्टर की प्रमुख यूनियन—ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI)—ने भी अपने सदस्यों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की।


पटना में दिखा मिलाजुला असर

राजधानी पटना में बंद का आंशिक असर देखने को मिला। कई बैंकों के बाहर हड़ताल संबंधी बैनर लगाए गए थे। कुछ संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर बैनर-पोस्टर के साथ प्रदर्शन करते नजर आए।

हालांकि आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं, लेकिन बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा।


‘आगे भी जारी रहेगी लड़ाई’

प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले नेता सरोज चौबे ने कहा कि श्रम विरोधी कानूनों और नीतियों के खिलाफ यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उनके अनुसार, यह एक दिन की सांकेतिक हड़ताल है और मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए।


नए श्रम कानूनों पर यूनियनों की आपत्ति

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि हाल ही में लागू किए गए चार नए लेबर कोड्स ने 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ली है, जिससे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

यूनियन नेताओं के मुताबिक:

  • हायरिंग और फायरिंग की प्रक्रिया आसान हो सकती है
  • सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान कमजोर पड़ सकते हैं
  • असंगठित क्षेत्र के मजदूर कानूनी सुरक्षा से बाहर हो सकते हैं
  • ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन के नियम सख्त किए गए हैं

साथ ही लंबे समय से पांच दिन के कार्य सप्ताह (Five-Day Working) और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग भी दोहराई गई।


सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि नए श्रम कानून श्रम व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लाए गए हैं। इनका उद्देश्य उद्योगों को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

हालांकि इस मुद्दे पर सरकार और ट्रेड यूनियनों के बीच मतभेद जारी हैं।


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Reporter: Ajit Kumar, Patna


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