पटना/नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी (JSP) की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के कहने पर पूरे राज्य के विधानसभा चुनाव को रद्द करने जैसा व्यापक निर्देश जारी नहीं कर सकता।
जन सुराज पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक कथित कल्याणकारी योजना के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बिहार में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी।
बिहार सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर विचार किया। याचिका में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि
“किसी राजनीतिक दल के अनुरोध पर पूरे राज्य के लिए ऐसे व्यापक निर्देश नहीं दिए जा सकते।”
पटना हाईकोर्ट जाने की दी सलाह
पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह को यह कहते हुए पटना उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी कि यह मामला केवल एक राज्य से संबंधित है और उचित मंच वही है।
चुनावी नतीजों का भी किया गया जिक्र
गौरतलब है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में
- भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 202 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी
- विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को 35 सीटें मिलीं
- जबकि जन सुराज पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया और उसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई
इन्हीं नतीजों के बाद जन सुराज पार्टी ने बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
10-10 हजार रुपये बांटने पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये देकर
- संविधान के अनुच्छेद 324
- और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123
का उल्लंघन किया।
योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार और लघु व्यवसाय शुरू करने के लिए शुरुआती वित्तीय सहायता दी जाती है। याचिका में दावा किया गया कि चुनाव से ठीक पहले करीब 15,600 करोड़ रुपये बांटे गए, जिससे अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिल पाया।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब यह साफ है कि अगर जन सुराज पार्टी इस मामले को आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे पटना हाईकोर्ट में ही कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।
