पटना: बिहार की राजधानी पटना में गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET (मेडिकल) की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के सामने आने के बाद अब यौन उत्पीड़न और हत्या की आशंका गहराती जा रही है।
इस मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक 6 संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए हैं, जबकि मृतका के पिता, भाई और मामा के डीएनए टेस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
🔍 पोस्टमार्टम के बाद बदली जांच की दिशा
सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर वीर्य (Semen) के अंश मिलने के संकेत मिले हैं। इसके बाद पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी कमजोर पड़ गई और जांच का फोकस यौन शोषण व हत्या की ओर शिफ्ट हो गया।
अब पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
🧬 6 संदिग्धों का DNA टेस्ट
पटना के गर्दनीबाग अस्पताल में मजिस्ट्रेट की निगरानी में 6 संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए गए।
- ये सभी संदिग्ध घटना वाले दिन
- हॉस्टल के आसपास
- सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियों के साथ देखे गए थे
सभी डीएनए सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजे गए हैं, जहां इन्हें फॉरेंसिक साक्ष्यों से मिलान किया जाएगा।
⚠️ पिता-भाई के DNA सैंपल पर मचा बवाल
जांच के दौरान पुलिस ने मृतका के पिता, भाई और मामा के भी डीएनए सैंपल लिए, जिस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए पटना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि:
“जो परिवार न्याय के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहा है, उसी को शक के घेरे में लेना अमानवीय है।”
पप्पू यादव ने पूछा कि अगर परिवार का कोई सदस्य दोषी होता, तो वे इस तरह इंसाफ की मांग क्यों करते?
🚨 दो थाना प्रभारियों पर गिरी गाज
मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में पटना पुलिस ने दो थाना प्रभारियों को निलंबित कर दिया है।
निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं:
- कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा
- चित्रगुप्त नगर थाना की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी
एसएसपी कार्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इन अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की और जांच में गंभीर शिथिलता बरती।
🧠 आत्महत्या से हत्या तक का सफर
शुरुआत में पुलिस इस मामले को आत्महत्या बता रही थी, लेकिन:
- परिजनों के लगातार विरोध
- मेडिकल रिपोर्ट
- फॉरेंसिक साक्ष्य
ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। अब जांच एजेंसियां इस केस को दुष्कर्म और हत्या के एंगल से देख रही हैं।
📌 राजनीतिक तूल पकड़ता मामला
छात्रा की मौत अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी नेता लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
