पटना: बिहार की स्थानीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। अब बिहार विधान परिषद (MLC) के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में पंच और सरपंचों को भी मतदान का अधिकार मिल गया है। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के बाद इस फैसले पर मुहर लगी है।
यह निर्णय बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा और ग्राम स्तर के प्रतिनिधियों की भूमिका को नई पहचान देगा।
अब तक क्या था नियम?
अब तक MLC चुनाव में केवल
- मुखिया
- वार्ड सदस्य
- पंचायत समिति सदस्य
- जिला परिषद सदस्य
- नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि
ही वोट डाल सकते थे।
ग्राम कचहरी के प्रतिनिधि यानी पंच और सरपंच इस प्रक्रिया से बाहर थे।
वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी
बिहार पंच-सरपंच संघ लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि उन्हें भी अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की तरह MLC चुनाव में वोटिंग का अधिकार मिले। अब इस फैसले से उनकी मांग पूरी हो गई है।
संवैधानिक आधार क्या है?
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि
संविधान के अनुच्छेद 171 (3)(A) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतें ‘स्थानीय निकाय’ की श्रेणी में आती हैं।
इस आधार पर ग्राम पंचायत के सभी निर्वाचित प्रतिनिधि, जिनमें पंच और सरपंच भी शामिल हैं, अब MLC चुनाव में मतदान के पात्र होंगे।
राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा असर
बिहार में पंच और सरपंचों की संख्या हजारों में है।
इस फैसले के बाद:
- मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नए वोटर जुड़ेंगे
- MLC चुनाव की रणनीति पूरी तरह बदलेगी
- उम्मीदवारों को अब गांव-गांव जाकर पंच-सरपंचों से संपर्क करना होगा
ग्राम कचहरी के प्रतिनिधियों का बढ़ेगा मनोबल
इस निर्णय से:
- पंच और सरपंचों का मनोबल बढ़ेगा
- स्थानीय शासन में उनकी भागीदारी और सशक्त होगी
- ग्राम स्तर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत बनेगी
