पटना: भारत रत्न और जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती के अवसर पर बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला बोलते हुए एक पुराने विवादित पत्र को फिर से सार्वजनिक किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वह चिट्ठी साझा की, जिसे लेकर लालू प्रसाद यादव पर कर्पूरी ठाकुर के अपमान का आरोप लगता रहा है।
‘जीप में तेल’ वाले पत्र को लेकर फिर सवाल
नीरज कुमार ने दावा किया कि यह पत्र उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव ने तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष को जवाब देते हुए कथित तौर पर जननायक कर्पूरी ठाकुर के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। जदयू का कहना है कि इसी पत्र में “जीप में तेल” वाला विवादित जिक्र किया गया था, जिसे कर्पूरी ठाकुर के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
तेजस्वी यादव से नीरज कुमार का सवाल
नीरज कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सीधे घेरते हुए कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत का दावा करने से पहले उन्हें यह बताना चाहिए कि उनके पिता द्वारा लिखे गए उस पत्र पर आज तक जवाब क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने एक्स पर लिखा—
“जननायक की उपाधि का दावा करने वाले तेजस्वी यादव जी, आपने कर्पूरी ठाकुर जी से सीखने की बात तो की, लेकिन उस पत्र का जवाब कब देंगे, जिसमें लालू प्रसाद यादव जी ने जननायक का अपमान किया था? यह सवाल आज भी कायम है।”
कर्पूरी ठाकुर जयंती पर सीएम नीतीश कुमार की श्रद्धांजलि
इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति भवन में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भी मुख्यमंत्री शामिल हुए।
इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गोखुल-कर्पूरी-फुलेश्वरी महाविद्यालय जाकर कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
रामनाथ ठाकुर की किताबों का हुआ विमोचन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर द्वारा लिखित दो पुस्तकों—
‘संसद और मैं’ तथा ‘मेरे संसदीय स्वर’—का भी विमोचन किया।
🔎 निष्कर्ष
कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर जहां एक ओर श्रद्धांजलि और सम्मान का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर JDU और RJD के बीच सियासी टकराव भी तेज हो गया है। ‘जीप में तेल’ वाला पुराना पत्र एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
