स्पर्म डीएनए से लेकर CCTV तक सबूतों की भरमार, फिर भी पटना गर्ल्स हॉस्टल केस में आरोपी बेनकाब नहीं

 


पटना।
मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब बेहद संगीन मोड़ पर पहुंच गया है। पटना पुलिस सबूत पर सबूत जुटा रही है, लेकिन अब तक गुनहगार गिरफ्त से बाहर है। ताजा एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिलने की पुष्टि के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

इस खुलासे के बाद मामला आत्महत्या या सामान्य संदिग्ध मौत से आगे बढ़कर यौन उत्पीड़न और हत्या की दिशा में जाता दिख रहा है।

केस की गंभीरता बढ़ी, एसआईटी का दायरा हुआ बड़ा

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का दायरा बढ़ा दिया गया है।
अब इस टीम में—

  • कुल 50 पुलिसकर्मी
  • आईपीएस अधिकारी
  • सीआईडी और तकनीकी विशेषज्ञ

को शामिल किया गया है। पहले एसआईटी में 30 सदस्य थे, जिसे अब बढ़ाकर 50 कर दिया गया है।

6 संदिग्ध हिरासत में, हॉस्टल मालिक के करीबियों पर शिकंजा

गुरुवार को एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। ये सभी हॉस्टल मालिक मनीष रंजन (मनीष चंद्रवंशी) और संचालिका नीलम अग्रवाल के करीबी बताए जा रहे हैं।

इसके साथ ही पुलिस की एक टीम ने—

  • मनीष रंजन के जहानाबाद स्थित पैतृक आवास पर छापेमारी
  • परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ
  • घटना वाले दिन मनीष की लोकेशन की पुष्टि

की। छापेमारी के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है।

अब तक 40 से अधिक डीएनए सैंपल

पुलिस ने जांच की कड़ियां जोड़ने के लिए अब तक लगभग 40 लोगों के डीएनए सैंपल इकट्ठा कर लिए हैं। इनमें—

  • हॉस्टल के कर्मचारी
  • मालिक के परिजन
  • छात्रा के करीबी और संपर्क में रहे लोग

शामिल हैं। अब इन सभी सैंपल्स का मिलान एफएसएल रिपोर्ट में मिले स्पर्म से किया जा रहा है।

स्पर्म की पुष्टि से बदला जांच का रुख

शुरुआत में पुलिस इस मामले को आत्महत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत मानकर चल रही थी, लेकिन एफएसएल रिपोर्ट में स्पर्म मिलने की पुष्टि ने पूरे केस की दिशा बदल दी है।

अब पुलिस का मुख्य फोकस इस सवाल पर है—

👉 स्पर्म किसका है?

हालांकि, पुलिस को अभी—

  • बिसरा रिपोर्ट
  • एम्स से सेकेंड ओपिनियन

का इंतजार है, जिससे मौत की असली वजह और समय पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

तकनीकी साक्ष्यों पर भी खास नजर

जांच एजेंसियां केवल फिजिकल सबूतों तक सीमित नहीं हैं। पुलिस—

  • संदिग्धों के मोबाइल की गूगल लोकेशन हिस्ट्री
  • मोबाइल टावर डंप
  • हॉस्टल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज

का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना की रात हॉस्टल में किसी बाहरी व्यक्ति या अजनबी की एंट्री हुई थी या नहीं।

इस कड़ी में हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उनके बेटे आशु अग्रवाल से दोबारा लंबी पूछताछ की गई है, ताकि उनके बयानों में मौजूद विरोधाभास को दूर किया जा सके।

सवाल बरकरार: कब पकड़ा जाएगा गुनहगार?

एफएसएल रिपोर्ट के खुलासे के बाद केस पूरी तरह से क्रिटिकल स्टेज में पहुंच चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

👉 क्या एसआईटी तकनीकी और डीएनए साक्ष्यों के आधार पर जल्द कातिल तक पहुंचेगी?
👉 या फिर यह मामला भी लंबी जांच की भेंट चढ़ जाएगा?


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