पटना।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में संगठनात्मक बदलाव कर पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सियासी संदेश साफ कर दिया है। पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और बगावत की चर्चाओं के बीच कुशवाहा ने विधायकों को अहम पद सौंपते हुए संगठन को मजबूत करने की कोशिश की है।
दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं प्रशांत पंकज चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन में हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव, जबकि मदन चौधरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। मदन चौधरी इससे पहले पार्टी में प्रभारी की भूमिका निभा रहे थे।
“संगठन विस्तार की जिम्मेदारी इन्हीं नेताओं पर” – उपेंद्र कुशवाहा
नई टीम की घोषणा के मौके पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि पार्टी को आगे बढ़ाने और मजबूत करने की जिम्मेदारी उन्हीं नेताओं को सौंपी गई है, जिनके नामों की घोषणा की गई है।
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में RLM की ओर से विशेष सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके।
कुशवाहा ने यह भी साफ किया कि दिनारा विधायक आलोक कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला पूरी सोच-समझ और राजनीतिक संतुलन के साथ लिया गया है।
संगठन बदलाव के बीच असंतोष की चर्चा
हालांकि, इस बड़े फेरबदल के बीच पार्टी के अंदरखाने की नाराजगी की चर्चाएं भी तेज हैं। बताया जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा से नाराज चल रहे तीन विधायकों में से दो को मना लिया गया है, जबकि एक विधायक अब भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।
आज के कार्यक्रम में विधायक माधव आनंद मौजूद थे, लेकिन उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई। वहीं, बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो की कुर्सी तक कार्यक्रम स्थल पर नहीं लगाई गई, जिससे सियासी चर्चाओं को और हवा मिली।
रामेश्वर महतो के सवाल पर क्या बोले कुशवाहा?
प्रेस वार्ता में जब उपेंद्र कुशवाहा से पूछा गया कि रामेश्वर महतो कार्यक्रम में क्यों नहीं आए, तो उन्होंने इसे हल्के में लेते हुए कहा—
“यह कोई विधायक दल की बैठक नहीं थी। अगर इस तरह देखा जाए तो एक और विधायक स्नेह लता भी कार्यक्रम में नहीं पहुंची थीं।”
गौरतलब है कि स्नेह लता उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी हैं और सासाराम सीट से विधायक हैं।
मंत्री पद विवाद से बढ़ी थी नाराजगी
राष्ट्रीय लोक मोर्चा फिलहाल एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। विधानसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल गठन के दौरान पार्टी के भीतर असंतोष तब बढ़ा, जब उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलवाई।
दीपक प्रकाश विधानसभा के सदस्य नहीं हैं, और इसी फैसले को लेकर पार्टी के कुछ विधायक खुलकर नाराज हो गए थे। तभी से संगठन में टूट और बगावत की आशंका जताई जा रही थी।
डैमेज कंट्रोल की कोशिश?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि RLM में हुए ये नए संगठनात्मक बदलाव डैमेज कंट्रोल की रणनीति का हिस्सा हैं। विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि—
👉 संगठन में उनकी भूमिका अहम है
👉 फैसलों में संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है
👉 और बगावत की किसी भी संभावना को समय रहते रोका जाएगा
अब देखना यह है कि कुशवाहा की यह नई टीम पार्टी को एकजुट रखने में कितनी सफल होती है।
