तेजस्वी यादव की बैठक लेकिन एक भी विधायक नहीं, आखिर मीटिंग का मकसद क्या था? यही तो असल सवाल है
पटना: बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में मिली हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने समीक्षा बैठक तो की, लेकिन ये मीटिंग कई सवालों को भी जन्म दे गई। राजनीतिक गलियारों में तो यह चर्चा है कि तेजस्वी यादव की यह बैठक जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव के दही चूड़ा भोज की प्रतिक्रिया में की गई। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उस भोज में शिरकत कर यह तो साफ कर दिया कि उनके परिवार में राजनीति का दूसरा केंद्र आकार लेने लगा है।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ, जानिए
राजद के युवराज तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार से हैरान-परेशान हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात ये रही कि वही मुद्दा इस समीक्षात्मक बैठक का हिस्सा नहीं बना। इस बैठक में विशेष रूप से लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मौजूद थे। तेजस्वी यादव ने इनके जरिए राजनीतिक शून्यता को भरने की कोशिश की। सवाल तो यह उठा कि अगर यह समीक्षात्मक बैठक थी तो इस बैठक में विधायक क्यों नहीं थे? वह भी उस हाल में जब राजनीतिक गलियारों में एनडीए के नामचीन नेता रोज ये दावा कर जा रहे हैं कि राजद के 18 विधायक उनके संपर्क में हैं। तेजस्वी यादव ने उन विधायकों के साथ बैठक ही नहीं, जिन्हें तोड़ने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में तेजस्वी को उन विधायकों की सुध लेनी चाहिए थी जो अभी भी उनके प्रति लॉयल हैं।
पारिवारिक कलह अब सतह से भी ऊपर
तेजस्वी यादव के द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक को अपने घर से ही मान्यता नहीं मिली। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने ही इस समीक्षात्मक बैठक को दिखावा कहा। साथ ही रोहिणी ने यह कह कर भी अपने विरोध का पारा बढ़ा दिया कि पहले अपने आस पास बैठे 'गिद्धों' को ठिकाने लगाइए और हार की जिम्मेदारी आगे बढ़ कर लीजिए। राजद की हार की वजह को ले कर रोहिणी आचार्य ने साफ कर दिया है कि बेहतर नेतृत्व के अभाव में और टिकट बंटवारा में गलतियों के कारण राजद को बिहार चुनाव 2025 में धूल चाटनी पड़ी।
बिहार विधानसभा का सत्र 2 फरवरी से
तेजस्वी यादव आपने विधायकों के साथ कोई बैठक भी नहीं कर रहे हैं। वह भी तब जब यह खबर भी सुर्खियों में है कि आगामी बिहार विधानसभा का सत्र 2 फरवरी से शुरू होना है। इस सत्र में क्या करना है? सत्ता को घेरने का क्या कार्यक्रम होगा? राजद के मुद्दे क्या होंगे? स्थानीय समस्या क्या-क्या है जिसे चलते विधानसभा सत्र में फ्लोर पर लाना है? इन सारे प्रश्नों या इन प्रश्नों को ले कर पार्टी को रणनीति पहले बनानी होगी। लेकिन इन सवालों का उत्तर तो तब ही मिलता जब बैठक में विधायक होते।
