पटना/औरंगाबाद।
बिहार की राजधानी पटना में गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल के दिनों में सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और निजी हॉस्टलों के संचालन पर चिंता बढ़ा दी है। ताजा मामला औरंगाबाद जिले की रहने वाली 15 वर्षीय छात्रा से जुड़ा है, जो पटना में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही थी और जिसकी मौत संदिग्ध हालात में एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में हो गई।
14 दिन बाद सामने आया मामला, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
यह घटना 6 जनवरी की बताई जा रही है, लेकिन मामला लगभग दो सप्ताह बाद उजागर हुआ। छात्रा का शव पटना के एग्जीबिशन रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में मिला था। परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि साजिश के तहत की गई हत्या है। उन्होंने हॉस्टल प्रबंधन, वार्डन और कुछ अन्य लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
इससे पहले पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में एक अन्य छात्रा की मौत का मामला सामने आया था, जिसमें गैंगरेप और हत्या के आरोप लगे हैं। उस केस की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। लगातार दो घटनाओं ने बिहार में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर माहौल गरमा दिया है।
“पढ़ने भेजा था, लाश मिली” – टूटे माता-पिता के सपने
मृत छात्रा के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने बेटी को बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ पटना पढ़ने भेजा था। लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें उसकी मौत की सूचना मिली। परिजनों के अनुसार, छात्रा फंदे से लटकी हुई पाई गई, लेकिन पुलिस और परिवार के पहुंचने से पहले ही शव को नीचे उतारकर बेड पर लिटा दिया गया।
परिवार का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और इससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा होती है।
FIR में हॉस्टल संचालक और वार्डन नामजद
मामले में छात्रा के परिजनों ने पटना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। एफआईआर में हॉस्टल संचालक, वार्डन खुशबू कुमारी, हॉस्टल इंचार्ज, छात्रा की एक सहेली समेत कई अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। परिजनों का कहना है कि इन सभी की मिलीभगत से हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
गर्ल्स हॉस्टल में कैसे घुसे दो युवक?
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना से पहले हॉस्टल में दो युवकों की एंट्री हुई थी। सवाल यह उठ रहा है कि एक गर्ल्स हॉस्टल में बाहरी युवक आखिर कैसे और किसकी अनुमति से दाखिल हुए। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में एक को छोड़ दिया गया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
छात्रा के पिता ने बताया कि उन्होंने 4 जनवरी को बेटी को पटना में हॉस्टल में छोड़ा था और 5-6 जनवरी को उससे बात भी हुई थी। 6 जनवरी की रात करीब एक बजे अचानक कॉल आया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। परिजनों का कहना है कि अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज
इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में बेटियों की सुरक्षा लगातार खतरे में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या राजधानी पटना में पढ़ने वाली छात्राएं अब सुरक्षित नहीं रहीं।
बड़ा सवाल: क्या पटना के गर्ल्स हॉस्टल सुरक्षित हैं?
लगातार सामने आ रही घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या निजी गर्ल्स हॉस्टलों पर प्रशासन की कोई प्रभावी निगरानी है। क्या नियमों के तहत हॉस्टल चल रहे हैं या फिर मनमानी का दौर जारी है? एक पिता जब अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजता है, तो उसे सुरक्षा की उम्मीद होती है—न कि ऐसी त्रासदी की।
फिलहाल पुलिस जांच जारी होने की बात कह रही है, लेकिन सच सामने आने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
