क्या BJP में शामिल होंगे तेज प्रताप यादव? विजय सिन्हा के घर दही-चूड़ा खाकर दिया बड़ा बयान

 क्या BJP में शामिल होंगे तेज प्रताप यादव? विजय सिन्हा के घर दही-चूड़ा खाकर दिया बड़ा बयान


Tej Pratap Yadav: मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार में एक दिलचस्प सियासी तस्वीर सामने आई है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बुधवार को डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस दौरान जब उनसे बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए एक चौंकाने वाला जवाब दिया।

तेजप्रताप ने कहा कि, 'अगर ऐसी कोई बात होगी तो सबसे पहले मीडिया को ही बताऊंगा, अभी क्यों बताऊं?' तेजप्रताप ने इसे एक पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपरा बताया और कहा कि वे अपना 'धर्म' निभाने आए हैं।

कई बड़े दिग्गजों को दिया न्योता

इस आयोजन की खास बात यह है कि उन्होंने इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े दिग्गजों को न्योता दिया है। माना जा रहा है कि इस भोज के जरिए तेज प्रताप अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे और आरजेडी से बाहर होने के बाद अपनी नई जमीन तलाशने की कोशिश करेंगे।

मकर संक्रांति का महाभोज
तेज प्रताप यादव भले ही वर्तमान में अपने परिवार और आरजेडी से दूर हों, लेकिन वे अपने पिता लालू प्रसाद यादव की परंपराओं को संजीदगी से आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में वे 14 जनवरी को खुद एक भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन करने जा रहे हैं।

छोटे भाई को न्योता देने खुद जाएंगे तेज प्रताप
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वे खुद भी भोज का आयोजन कर रहे हैं और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को न्योता देने खुद जाएंगे। वहीं, विजय सिन्हा ने कहा कि 'हम बिहारी सब पर भारी' के संकल्प के साथ बिहार को आगे ले जाने के लिए सबको साथ आना होगा।

तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि राजनीति में विचारधाराएं और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों और सामाजिक शिष्टाचार में मेल-मिलाप बना रहना चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान और उपमुख्यमंत्री के साथ उनकी सौहार्दपूर्ण केमिस्ट्री ने राजनीतिक पंडितों को भविष्य की नई संभावनाओं पर चर्चा करने का मौका दे दिया है।

विजय सिन्हा का समावेशी बिहार का संदेश
इस मुलाकात पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भी सकारात्मक टिप्पणी करते हुए इसे एक नई शुरुआत की तरह पेश किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पृष्ठभूमि, संस्कृति और संस्कारों के लोग जब एक मंच पर आते हैं, तो इससे राज्य में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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