पटना:
बिहार के आम नागरिकों के लिए जमीन से जुड़े मामलों में एक बड़ी राहत की खबर है। Bihar Bhumi Portal पर अब ऐसी नई सुविधा शुरू की गई है, जिसके तहत वे राजस्व अभिलेख ऑनलाइन स्कैन कराने का अनुरोध कर सकते हैं, जो अभी तक पोर्टल पर उपलब्ध नहीं थे। इस नई व्यवस्था की जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट के माध्यम से साझा की है।
क्या है नई सुविधा?
विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार,
अब नागरिक भू-अभिलेख पोर्टल पर उन दस्तावेजों को स्कैन कराने के लिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट कर सकते हैं, जो अब तक डिजिटल रूप में उपलब्ध नहीं थे।
इस प्रक्रिया में
- नागरिक ऑनलाइन अनुरोध करेंगे
- संबंधित अंचल अधिकारी (CO) दस्तावेजों की जांच करेंगे
- सत्यापन के बाद दस्तावेजों को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा
- इसके बाद नागरिक को उसकी डिजिटल कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी
इस पहल से जमीन से जुड़े दस्तावेजों की तलाश में अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा।
कौन-कौन से राजस्व दस्तावेज होंगे ऑनलाइन उपलब्ध?
अब जिन महत्वपूर्ण जमीन से जुड़े दस्तावेजों को ऑनलाइन देखा और प्राप्त किया जा सकेगा, उनमें शामिल हैं—
- खतियान (पुराना एवं नया)
- दाखिल-खारिज (Mutation) के बाद की जमाबंदी
- भूमि रसीद (ऑनलाइन/ऑफलाइन)
- केवाला (Sale Deed)
- भूमि नक्शा
- बंटवारा नामा
- सर्वे खसरा पंजी
पहले इन दस्तावेजों के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा डिजिटल रूप से घर बैठे उपलब्ध होगी।
अनस्कैन डॉक्यूमेंट्स भी होंगे डिजिटल
अब तक जो राजस्व अभिलेख स्कैन नहीं किए गए थे, वे भी इस नई व्यवस्था के तहत डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे जमीन विवादों में कमी आने और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव
बिहार सरकार ने जमीन की खरीद-बिक्री को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी अहम बदलाव किए हैं।
अब राज्य में
- किसी भी जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री
- केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर नहीं होगी
- बल्कि GIS (Geographic Information System) तकनीक के जरिए
- जमीन का फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है
GIS तकनीक से क्या होगा फायदा?
विभाग के अनुसार, रजिस्ट्री से पहले
- जमीन की सटीक लोकेशन
- वास्तविक क्षेत्रफल
- उस पर मौजूद निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड
तैयार किया जाएगा, ताकि दस्तावेजों और जमीनी हकीकत में कोई अंतर न रहे। इससे फर्जीवाड़ा, विवाद और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से
- जमीन से जुड़े काम होंगे आसान
- पारदर्शिता बढ़ेगी
- समय और पैसे की बचत होगी
- भूमि विवादों में कमी आएगी
बिहार सरकार की यह पहल डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
