बिहार को बाढ़ से बचाने की बड़ी तैयारी, सम्राट ने केंद्र से मांगे 11 हजार करोड़
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
पटना/नई दिल्ली: Bihar Development Projects को लेकर बिहार सरकार ने केंद्र के सामने बड़ी वित्तीय मांग रखी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की बाढ़ समस्या और लंबित जल परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मांगी है। Bihar Development Projects के तहत कोसी-मेची लिंक, पश्चिमी कोसी नहर और कई अहम बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बिहार में हर साल कोसी, गंडक, बागमती और अन्य नदियों के उफान से बड़ी आबादी प्रभावित होती है। कई इलाकों में बाढ़ फसलों, घरों और आजीविका पर सीधा असर डालती है। इसी चुनौती के बीच राज्य सरकार ने लंबित परियोजनाओं के लिए केंद्र से अधिक आर्थिक सहयोग की मांग की है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ बैठक कर बिहार की प्रमुख जल और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं पर चर्चा की। बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य फोकस उन परियोजनाओं पर रहा, जिनका काम वित्तीय सहायता, मंजूरी या डीपीआर प्रक्रिया के कारण अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से लंबित योजनाओं के लिए जल्द वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने और जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लंबे समय में राहत मिल सकती है।
कोसी-मेची लिंक परियोजना के लिए बाकी राशि की मांग
बैठक में कोसी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण की वित्तीय प्रगति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत करीब 3,652.56 करोड़ रुपये है। पहले चरण के लिए 965.41 करोड़ रुपये का प्रावधान निर्धारित किया गया है। हालांकि, अब तक करीब 156.745 करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परियोजना के लिए शेष राशि जल्द जारी करने की मांग की। साथ ही दूसरे चरण के डीपीआर को भी मंजूरी देने का अनुरोध किया गया। कोसी क्षेत्र बिहार के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में शामिल रहा है। ऐसे में इस परियोजना की प्रगति को राज्य सरकार बाढ़ प्रबंधन और जल संसाधन विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।
पश्चिमी कोसी नहर समेत कई बड़ी योजनाओं पर जोर
बैठक में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए भी केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग रखी गई। इस परियोजना का डीपीआर करीब 8,338.89 करोड़ रुपये का बताया गया है। जानकारी के मुताबिक, परियोजना का पहला चरण बिहार सरकार अपने संसाधनों से शुरू कर चुकी है। अब राज्य सरकार चाहती है कि इस बड़ी योजना को आगे बढ़ाने में केंद्र से भी पर्याप्त वित्तीय सहयोग मिले। इसके अलावा इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक और सारण बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना को केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल करने की मांग की गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जलनिकासी से जुड़ी समस्याओं का समाधान तलाशना है।
नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी देने की मांग
मुख्यमंत्री ने नेपाल से संबंधित कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना को भी जल्द गति देने की मांग की। इन परियोजनाओं के सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया गया। नेपाल से आने वाली नदियों का बिहार की बाढ़ स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसलिए राज्य सरकार लंबे समय से सीमा पार जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण मानती रही है। हालांकि, इन योजनाओं की प्रगति कई स्तरों पर तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय समन्वय से भी जुड़ी रहती है। बैठक में बांग्लादेश के साथ जल समझौते के नवीनीकरण का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी नए या नवीनीकृत समझौते में बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
बिहार के लिए FMBAP बजट बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम यानी FMBAP के तहत बिहार के लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बिहार को देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक बताते हुए जरूरत के अनुरूप केंद्रीय सहायता की मांग रखी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार का लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की समस्या से प्रभावित माना जाता है। गंगा, कोसी, बागमती और अन्य नदियों के जलस्तर बढ़ने पर हर साल लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार का तर्क है कि तटबंधों, जलनिकासी व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण संरचनाओं और अन्य जरूरी परियोजनाओं के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।
राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की भी उठी मांग
बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर गाद प्रबंधन नीति तैयार करने की मांग भी रखी गई। बिहार की कई नदियों में गाद जमा होने को बाढ़ प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती माना जाता है। नदी तल में गाद जमा होने से कई स्थानों पर जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार चाहती है कि इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीति और दीर्घकालिक रणनीति बनाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल तटबंध निर्माण से बाढ़ की हर समस्या का समाधान संभव नहीं है। जल निकासी, नदी प्रबंधन, गाद नियंत्रण और अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय समन्वय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अब केंद्र के फैसले पर टिकी नजर
करीब 11 हजार करोड़ रुपये की मांग के बाद अब बिहार की नजर केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। अगर लंबित वित्तीय सहायता और प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो बिहार में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कामों को गति मिल सकती है। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक असर उनकी मंजूरी, फंड जारी होने और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा होने पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह बैठक बिहार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य सरकार ने एक साथ कोसी-मेची लिंक, पश्चिमी कोसी नहर, नेपाल से जुड़ी जल परियोजनाओं, गाद प्रबंधन और FMBAP बजट जैसे कई बड़े मुद्दे केंद्र के सामने रखे हैं। बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि केंद्र से मांगी गई सहायता और लंबित योजनाओं को कब तक मंजूरी मिलती है और इन परियोजनाओं का लाभ जमीन पर कब दिखाई देता है।