बिहार की 9 बंद चीनी मिलें फिर होंगी चालू! सरकार ने निवेशकों के लिए खोला रास्ता
बिहार की बंद चीनी मिलें एक बार फिर चर्चा में हैं। बिहार की बंद चीनी मिलें दोबारा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन कर निवेशकों और सहकारी समितियों को बंद मिलों की जमीन सौंपने का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले से वर्षों से बंद पड़ी मिलों के पुनर्जीवन की उम्मीद बढ़ गई है। सरकार का लक्ष्य चीनी उद्योग को नई गति देना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
सरकार ने क्यों किया अधिनियम में संशोधन?
बिहार सरकार ने 1985 के चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में बदलाव किया है। पहले इस कानून के तहत अधिग्रहित चीनी मिलों का संचालन केवल राज्य सरकार ही कर सकती थी।
यही कारण था कि बंद मिलों की जमीन निजी निवेशकों या सहकारी समितियों को सौंपने में कानूनी अड़चन आ रही थी। अब संशोधन के बाद जमीन का स्वामित्व हस्तांतरित किया जा सकेगा, जिससे निवेश प्रक्रिया तेज होगी और नई परियोजनाओं को गति मिलेगी।
कौन-कौन सी चीनी मिलें पहले चरण में शुरू होंगी?
राज्य सरकार ने पहले चरण में तीन बंद चीनी मिलों को नवंबर 2026 से फिर से चालू करने की योजना बनाई है।
इनमें शामिल हैं—
- सकरी चीनी मिल (मधुबनी)
- रैयाम चीनी मिल (दरभंगा)
- सासामूसा चीनी मिल (गोपालगंज)
सकरी और रैयाम चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। वहीं सासामूसा चीनी मिल के लिए निवेशक का चयन अंतिम चरण में है।
यदि यह योजना समय पर पूरी होती है तो अगले गन्ना पेराई सत्र से इन मिलों में उत्पादन शुरू हो सकता है।
बाकी छह बंद चीनी मिलों का क्या होगा?
सरकार का उद्देश्य केवल तीन मिलों तक सीमित नहीं है। राज्य की कुल नौ बंद चीनी मिलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा चालू करने की तैयारी चल रही है।
इसके लिए निजी निवेशकों और सहकारी संस्थाओं को आमंत्रित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी भागीदारी से चीनी उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी तथा लंबे समय से बंद औद्योगिक परिसरों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
किसानों और स्थानीय रोजगार को कैसे मिलेगा फायदा?
चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने से सबसे बड़ा लाभ गन्ना किसानों को मिलने की उम्मीद है।
- गन्ने की स्थानीय खरीद बढ़ेगी।
- किसानों को परिवहन लागत कम करनी पड़ेगी।
- समय पर भुगतान की संभावना मजबूत होगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
- परिवहन, मशीनरी, व्यापार और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
'समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार' योजना को मिलेगी रफ्तार
राज्य सरकार सात निश्चय-3 के तहत "समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार" अभियान को आगे बढ़ा रही है। इसी रणनीति के तहत चीनी उद्योग और गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है।
गन्ना उद्योग विभाग नई चीनी मिलों की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, तकनीकी सहयोग, गन्ना क्षेत्र विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने पर काम कर रहा है।
इन परियोजनाओं की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से निवेश प्रस्तावों और परियोजनाओं की समीक्षा कर रही है।
एनएफसीएसएफ और इंडियन पोटाश लिमिटेड की क्या भूमिका है?
राज्य सरकार और सहकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (NFCSF), नई दिल्ली के साथ समझौता किया है।
इस समझौते के तहत सकरी और रैयाम चीनी मिलों की तकनीकी तथा आर्थिक व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन कराया गया। दोनों मिलों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है।
हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों मिलों के संचालन के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड से भी प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
क्या बदल सकता है बिहार का चीनी उद्योग?
यदि सरकार की योजना तय समय पर लागू होती है, तो बिहार का चीनी उद्योग कई वर्षों बाद नई दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मुख्य बिंदु:
- 1985 के अधिनियम में संशोधन से जमीन हस्तांतरण का रास्ता साफ।
- नौ बंद चीनी मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू।
- नवंबर 2026 से सकरी, रैयाम और सासामूसा मिल चालू करने का लक्ष्य।
- किसानों, स्थानीय रोजगार और निवेश को मिलेगा बड़ा लाभ।
- राज्य में गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद।
सरकार का यह कदम औद्योगिक विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में निवेशकों के चयन और परियोजनाओं की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।
