सूर्यकुमार यादव को भारतीय टी20 टीम से बाहर किए जाने के फैसले पर अब पूर्व स्पिनर आर अश्विन ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। सूर्यकुमार यादव पिछले टी20 विश्व कप विजेता अभियान में टीम का हिस्सा रहे थे और कप्तान के तौर पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में अश्विन का मानना है कि उन्हें खुद को बल्लेबाज के रूप में साबित करने के लिए थोड़ा और समय दिया जाना चाहिए था।
भारतीय क्रिकेट में यह फैसला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि विश्व कप जीतने के कुछ ही महीनों बाद कप्तान को टीम से बाहर किया गया है। अश्विन ने इसे चयन प्रक्रिया के लिहाज से एक महत्वपूर्ण और असामान्य निर्णय बताया है।
अश्विन ने क्यों उठाए सवाल?
एक क्रिकेट चर्चा कार्यक्रम में आर अश्विन ने कहा कि यदि वह खुद को सूर्यकुमार यादव की स्थिति में रखकर सोचते हैं, तो यह फैसला काफी कठिन महसूस होता है।
अश्विन के मुताबिक किसी खिलाड़ी का फॉर्म अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, लेकिन उसके नेतृत्व और टीम में योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान को इतनी जल्दी बाहर किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि किसी खिलाड़ी को खराब फॉर्म से उबरने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, खासकर तब जब उसने हाल ही में टीम को बड़ी सफलता दिलाई हो।
विश्व कप और IPL में कैसा रहा प्रदर्शन?
टी20 विश्व कप में सूर्यकुमार यादव का प्रदर्शन उनके सामान्य मानकों के मुताबिक बहुत प्रभावशाली नहीं रहा था।
उन्होंने टूर्नामेंट में 136.72 के स्ट्राइक रेट से 242 रन बनाए। इसके बाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी वह अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं दिखे और 147.54 के स्ट्राइक रेट से 270 रन ही बना सके।
हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी खिलाड़ी के मूल्यांकन में केवल कुछ महीनों के प्रदर्शन को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उसके समग्र योगदान को भी देखा जाना चाहिए।
क्या चयन प्रक्रिया में बनी नई मिसाल?
अश्विन ने इस फैसले को भारतीय क्रिकेट चयन इतिहास में एक नई मिसाल बताया है।
उनका कहना है कि भविष्य में जब भी किसी बड़े खिलाड़ी या कप्तान को टीम से बाहर करने का मामला सामने आएगा, तब इस फैसले का उदाहरण जरूर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि संभव है चयनकर्ताओं और खिलाड़ी के बीच बातचीत हुई हो, लेकिन सार्वजनिक रूप से यह निर्णय काफी बड़ा और चौंकाने वाला माना जा रहा है।
अश्विन ने सवाल उठाया कि क्या पहले कभी किसी विश्व कप विजेता कप्तान को इतनी जल्दी टीम से बाहर किया गया था।
श्रेयस अय्यर को मिली बड़ी जिम्मेदारी
सूर्यकुमार यादव की जगह अब श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है।
दिलचस्प बात यह है कि श्रेयस पिछले दो वर्षों से अधिक समय तक भारत की टी20 टीम का हिस्सा नहीं रहे थे। हालांकि इस दौरान उन्होंने आईपीएल में शानदार कप्तानी का प्रदर्शन किया।
उन्होंने पहले कोलकाता नाइट राइडर्स को खिताब दिलाया और बाद में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही उपलब्धियां उनके पक्ष में गईं।
श्रेयस के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
अश्विन का मानना है कि कप्तान के रूप में सीधे टीम में वापसी करना श्रेयस अय्यर के लिए आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि टीम के भीतर कई ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे हैं और कप्तानी की दावेदारी भी रखते हैं। ऐसे में नए कप्तान के सामने टीम का संतुलन बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी।
पूर्व क्रिकेटर ने यह भी कहा कि टीम संस्कृति और नेतृत्व की निरंतरता किसी भी सफल टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
अक्षर पटेल को लेकर भी उठे सवाल
अश्विन ने चर्चा के दौरान उपकप्तान अक्षर पटेल का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि यदि उपकप्तान को अगला कप्तान नहीं बनाया जाता है, तो फिर चयन प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। टीम में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान स्पष्ट रणनीति होना जरूरी माना जाता है।
क्रिकेट विश्लेषकों का भी मानना है कि नेतृत्व से जुड़े फैसलों का असर केवल कप्तान पर नहीं, बल्कि पूरे ड्रेसिंग रूम के माहौल पर पड़ता है।
आगे क्या होगा?
भारतीय टी20 टीम में यह बदलाव आने वाले महीनों में काफी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
एक तरफ श्रेयस अय्यर के नेतृत्व पर सबकी नजर होगी, तो दूसरी तरफ सूर्यकुमार यादव की वापसी की संभावनाओं पर भी क्रिकेट प्रशंसक ध्यान बनाए रखेंगे।
फिलहाल चयनकर्ताओं के इस फैसले ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व, प्रदर्शन और चयन मानकों को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है। आने वाले टूर्नामेंटों में दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस चर्चा की दिशा तय कर सकता है।
