गया में महिला सिपाही विवाद पर गोलीकांड, 2 सस्पेंड, आरोपी जेल भेजा
Gaya Police Firing Case ने बिहार में पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Gaya Police Firing Case में महिला सिपाही से जुड़े विवाद के बाद दो लोगों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें एक सिपाही चालक घायल हो गया। इस मामले में पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला सिपाही और घायल सिपाही चालक को निलंबित कर दिया है, जबकि आरोपी निजी ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
अवैध संबंध के विवाद में चली गोली
जानकारी के अनुसार, यह मामला व्यक्तिगत संबंधों के विवाद से जुड़ा हुआ है।
परैया थाना में कार्यरत निजी ड्राइवर गौतम कुमार और महिला सिपाही के बीच पहले से संबंध थे।
बाद में उसी महिला सिपाही के साथ कोतवाली थाना के सिपाही चालक नीरज कुमार के करीब आने से विवाद बढ़ गया।
महिला सिपाही के किराए के घर में हुई घटना
यह घटना सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के पितामहेश्वर इलाके में एक किराए के मकान में हुई।
शनिवार की सुबह करीब 3 से 3:30 बजे के बीच गोलीबारी हुई।
घायल सिपाही चालक नीरज कुमार खुद बाइक चलाकर थाना पहुंचा और साथियों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस की कार्रवाई—दो सस्पेंड, आरोपी गिरफ्तार
प्रभारी एसएसपी सह सिटी एसपी कोटा किरण कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया।
सिटी डीएसपी की अनुशंसा पर महिला सिपाही और सिपाही चालक नीरज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं, जिससे अनुशासन बनाए रखा जा सके।
आरोपी ने कबूला जुर्म, मोबाइल से मिले सबूत
पुलिस की पूछताछ में आरोपी गौतम कुमार ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
उसने बताया कि संबंधों के विवाद के कारण उसने गोली चलाई।
पुलिस ने उसके पास से मोबाइल फोन जब्त किया, जिसमें महिला सिपाही से बातचीत और कई फोटो व वीडियो मिले हैं।
घायल सिपाही का इलाज जारी, हालत में सुधार
घायल सिपाही चालक नीरज कुमार का इलाज गया के मगध मेडिकल अस्पताल में चल रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत अब स्थिर है और धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
पुलिस इस मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
विभाग ने दिया सख्त संदेश
पुलिस प्रशासन ने इस घटना को अनुशासनहीनता और सेवा आचरण का गंभीर उल्लंघन माना है।
अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कदम को विभाग के भीतर अनुशासन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
