
बोकारो ट्रेजरी घोटाला में झारखंड CID ने बड़ा खुलासा करते हुए करीब 10 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल का पता लगाया है। बोकारो ट्रेजरी घोटाला से जुड़े इस मामले में एक अकाउंटेंट और दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी ने संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी करोड़ों की फिक्स्ड डिपॉजिट भी फ्रीज कर दी है, जिससे पूरे नेटवर्क का दायरा सामने आने लगा है।
इस कार्रवाई के बाद राज्यभर में कोषागार व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है।
CID की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
झारखंड CID ने बोकारो पुलिस विभाग के अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया है। उनके साथ ASI अशोक कुमार भंडारी और होम गार्ड जवान सतीश कुमार को भी हिरासत में लिया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, ये सभी लोग कथित रूप से कोषागार से अवैध निकासी और फर्जी ट्रांजेक्शन में शामिल थे। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उनसे आगे पूछताछ जारी है।
10 करोड़ का मनी ट्रेल और FD फ्रीज
CID की जांच में लगभग 10 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल का खुलासा हुआ है। यह रकम अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर की गई थी, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
एजेंसी ने 1.8 करोड़ रुपये और 18 लाख रुपये की दो फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) को फ्रीज कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह राशि घोटाले से जुड़ी हो सकती है और आगे की जांच में और भी संपत्तियां सामने आ सकती हैं।
छापेमारी में मिले संपत्ति के अहम दस्तावेज
ASI अशोक कुमार भंडारी के घर पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन दस्तावेजों से उनकी कथित अवैध संपत्तियों की जानकारी मिली है।
जांच में सामने आया कि उनके पास बोकारो के तेलीडीह इलाके में जमीन और उस पर बना तीन मंजिला आलीशान घर है। CID अब इन संपत्तियों के स्रोत की भी जांच कर रही है।
कैसे हुआ घोटाला, जानें पूरा मामला
जांच के अनुसार, अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे ने कई लोगों के नाम पर वेतन वितरण खाते से छह करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। यह निकासी फर्जी दस्तावेजों और खातों के जरिए की गई।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब कोषागार अधिकारी गुलाब चंद ओरांव ने बोकारो स्टील सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अन्य संदिग्ध भी सामने आए।
अन्य जिलों में भी फैला नेटवर्क
जांच के दौरान हजारीबाग जिले में भी इसी तरह के गबन का मामला सामने आया, जहां तीन लोगों को 15.41 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
इसके अलावा, आरोपियों के परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित नेटवर्क के तहत किया गया घोटाला था।
सरकार का बड़ा फैसला: सभी कोषागारों का ऑडिट
मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सभी जिला कोषागारों का व्यापक ऑडिट कराने का आदेश दिया है।
सरकार का मानना है कि इस जांच से अन्य संभावित गड़बड़ियों का भी खुलासा हो सकता है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सकेगा।
आगे क्या?
CID की जांच अभी जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सरकारी वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को फिर से उजागर करता है।
Source: आधिकारिक CID बयान व मीडिया रिपोर्ट्स