
9 हजार कमाने वाले पति को 10 हजार देने का आदेश
भारत में पत्नी भरण-पोषण सुप्रीम कोर्ट फैसला को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई में साफ कर दिया कि पत्नी का भरण-पोषण पति की जिम्मेदारी है। यह मामला तब सामने आया जब एक पति ने दावा किया कि वह रोजाना सिर्फ 325 रुपये कमाता है और हर महीने 10 हजार रुपये देना संभव नहीं है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी को 10 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें पत्नी ने गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की थी। पहले ट्रायल कोर्ट ने पति को 6 लाख रुपये एकमुश्त देने का आदेश दिया था, जिसे पति ने चुका भी दिया था।
लेकिन पत्नी इससे संतुष्ट नहीं थी और उसने हाईकोर्ट में 30 लाख रुपये की मांग करते हुए चुनौती दी। हाईकोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अंतिम सुनवाई में बड़ा फैसला आया।
पति की आय पर कोर्ट ने क्यों जताया संदेह?
सुनवाई के दौरान पति ने दावा किया कि उसकी मासिक आय केवल 9 हजार रुपये है। इस पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए।
बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में इतनी कम आय होना “विश्वसनीय नहीं” लगता। जजों ने पूछा कि आखिर 9 हजार रुपये में आज कौन अपना खर्च चला सकता है?
यह टिप्पणी इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुई और कोर्ट ने पति के दावे को कमजोर माना।
पत्नी ने रखे थे दो बड़े विकल्प
पत्नी की तरफ से वकील ने कोर्ट के सामने दो विकल्प रखे:
- हर महीने 12 हजार रुपये गुजारा भत्ता (हर साल बढ़ोतरी के साथ)
- या फिर 30 लाख रुपये की एकमुश्त राशि
हालांकि कोर्ट ने इन दोनों विकल्पों को सीधे स्वीकार नहीं किया, लेकिन संतुलित निर्णय लेते हुए 10 हजार रुपये प्रति माह तय किया।
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि:
“पत्नी का भरण-पोषण करना पति की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।”
कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और पति को 10 हजार रुपये मासिक भत्ता देने का आदेश बरकरार रखा।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि कम आय का दावा करके जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला समाज के लिए एक बड़ा संदेश देता है।
इस फैसले से लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि शादी के बाद आर्थिक जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं है। खासकर ऐसे मामलों में जहां पत्नी आर्थिक रूप से निर्भर हो, कोर्ट उसका संरक्षण करेगा।
इस फैसले से लोगों को राहत मिलेगी, खासकर उन महिलाओं को जो भरण-पोषण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
कानूनी नजरिए से क्यों अहम है यह फैसला?
- यह फैसला भविष्य के मामलों में मिसाल बनेगा
- पति की आय छिपाने या कम बताने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी
- महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दिखाता है कि न्यायालय सामाजिक संतुलन और न्याय को प्राथमिकता देता है।
विशेष अंश (संक्षिप्त सारांश)
- सुप्रीम कोर्ट ने पति को 10 हजार मासिक भत्ता देने का आदेश दिया
- पति ने 9 हजार आय का दावा किया था
- कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय बताया
- पत्नी का भरण-पोषण पति की जिम्मेदारी माना
Source: Bar and Bench रिपोर्ट