होनहार अफसर से आरोपी तक: SDM काजल मीणा की पूरी कहानी

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 राजस्थान में SDM काजल मीणा रिश्वत केस ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक समय तक होनहार अफसर मानी जाने वाली SDM काजल मीणा रिश्वत केस में अब आरोपी बन गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

इस कार्रवाई में उनके साथ दो अन्य कर्मचारी भी पकड़े गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच लगातार जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

कौन हैं SDM काजल मीणा?

काजल मीणा राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की अधिकारी हैं, जो करौली जिले के नादौती उपखंड में एसडीएम के पद पर तैनात थीं।

उनकी पहचान एक मेहनती और तेजतर्रार अफसर के रूप में बनी थी। कम समय में ही उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में सक्रियता दिखाई और अपनी अलग छवि बनाई।

लेकिन अब वही नाम एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में घिरा हुआ है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

काजल मीणा का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। वह सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर क्षेत्र से आती हैं।

उन्होंने पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।

पढ़ाई के दौरान ही उनकी पहचान एक गंभीर और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा के रूप में बनने लगी थी।

सरकारी नौकरी छोड़कर चुना प्रशासनिक रास्ता

आईआईटी से पढ़ाई के बाद काजल मीणा ने दिल्ली में दूरसंचार विभाग में सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में काम किया।

इसके बाद उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में भी सेवाएं दीं। यह उनके करियर का स्थिर दौर माना जा रहा था।

लेकिन उन्होंने बड़ा लक्ष्य चुनते हुए नौकरी छोड़ दी और प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की।

2024 में RAS बनकर हासिल की नई पहचान

कड़ी मेहनत के बाद काजल मीणा ने 2024 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की।

यह उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग प्रतापगढ़ में हुई।

बाद में 28 अक्टूबर 2025 को उन्हें नादौती (करौली) में एसडीएम के पद पर नियुक्त किया गया।

रिश्वत मामले में कैसे हुई गिरफ्तारी?

एसीबी को शिकायत मिली थी कि जमीन की फाइनल डिक्री जारी करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है।

जांच में सामने आया कि यह मांग एसडीएम स्तर से की जा रही थी और उनके रीडर के जरिए पूरी प्रक्रिया संचालित हो रही थी।

पहले एक लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बाद में 60 हजार रुपये में सौदा तय हुआ।

ट्रैप ऑपरेशन में रंगे हाथों पकड़ी गईं

16 अप्रैल को एसीबी ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया। परिवादी को कार्यालय बुलाया गया और जैसे ही पैसे दिए गए, टीम ने कार्रवाई कर दी।

रीडर ने पैसे लेकर वरिष्ठ सहायक को दिए, वहीं बातचीत में एसडीएम की सहमति भी सामने आई।

इसके बाद एसीबी ने काजल मीणा समेत तीन लोगों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

तलाशी में मिला लाखों का कैश

कार्रवाई के दौरान एसीबी को 60 हजार रुपये की रिश्वत राशि के अलावा 4 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी मिली।

इस बरामदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह रकम कहां से आई, इसकी भी जांच की जा रही है।

अब आगे क्या होगा?

एसीबी ने काजल मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

फिलहाल उनसे पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे होने की संभावना है।

एक कहानी, जो बन गई चेतावनी

काजल मीणा की कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं है, बल्कि यह उस पतली रेखा को भी दिखाती है जहां सफलता और गलती के बीच फर्क खत्म हो जाता है।

एक तरफ उनकी मेहनत और उपलब्धियां हैं, वहीं दूसरी तरफ एक निर्णय जिसने उनके पूरे करियर को संकट में डाल दिया।

यह मामला प्रशासनिक जिम्मेदारियों और नैतिकता के महत्व को भी सामने लाता है।


Source: एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी

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