महिला आरक्षण बिल पर, विपक्षी नेताओं को देश की महिलाओं से कोई मतलब नहीं : सीएम रेखा गुप्ता


 

महिला आरक्षण को लेकर महिला आरक्षण बिल विवाद अब और तेज हो गया है। बिल खारिज होने के बाद महिला आरक्षण बिल विवाद पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले से ही महिलाओं को संसद और विधानसभाओं तक पहुंचने से रोकने की रणनीति बना चुका था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

क्या कहा CM रेखा गुप्ता ने?

रेखा गुप्ता ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि कुछ विपक्षी दलों ने जानबूझकर महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया।

उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये पार्टियां महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतीं।

उनके अनुसार, यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने अलग-अलग बहाने बनाकर बिल का विरोध किया।

कभी जाति आधारित आरक्षण की बात उठाई गई, तो कभी धर्म के आधार पर सवाल खड़े किए गए।

इसके अलावा सीटों की संख्या और परिसीमन जैसे मुद्दों को भी विवाद का कारण बनाया गया।

सीटों की संख्या पर भी उठाए सवाल

रेखा गुप्ता ने 1971 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय देश की आबादी करीब 50–55 करोड़ थी और लोकसभा की 543 सीटें तय की गई थीं।

आज देश की आबादी 140 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कुछ नेता सीटें बढ़ने से इसलिए डरते हैं, क्योंकि इससे नए चेहरों को मौका मिलेगा।

“महिलाओं को रोकना चाहता है विपक्ष”

सीएम गुप्ता ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि देश की आधी आबादी, यानी करीब 70 करोड़ महिलाएं, संसद तक पहुंचें।

उन्होंने कहा कि कई देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 40–50 प्रतिशत तक है, लेकिन भारत में अब भी महिलाएं पीछे हैं।

इस स्थिति को उन्होंने ‘महिला विरोधी सोच’ बताया।

व्यक्तिगत टिप्पणियों से बढ़ी सियासत

रेखा गुप्ता ने कुछ नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की।

उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को सिर्फ अपने परिवार की महिलाएं ही नजर आती हैं।

हालांकि इस तरह के बयान से राजनीतिक बहस और तीखी हो गई है।

महिलाओं से जवाब मांगने की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विपक्षी नेता अपने क्षेत्रों में जाएंगे, तो महिलाएं उनसे सवाल करेंगी।

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएं और जवाब मांगें।

उनका कहना है कि महिलाओं को उनका हक मिलना ही चाहिए।

राजनीतिक असर क्या हो सकता है?

महिला आरक्षण बिल का मुद्दा अब राजनीतिक एजेंडा बनता जा रहा है।

एक ओर सरकार इसे महिलाओं के अधिकार से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है।

आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन सकता है।


Source: मुख्यमंत्री का आधिकारिक बयान

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