मांझी का बागेश्वर बाबा पर पलटवार, ‘4 बच्चे’ बयान पर दिया जवाब, जनसंख्या सोच पर बोले
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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का जनसंख्या पर बयान इन दिनों राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। जनसंख्या पर बयान देते हुए उन्होंने कहा कि समाज को संतानोत्पत्ति के मुद्दे पर संकीर्ण सोच नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई और कहा कि जनसंख्या को केवल बोझ के रूप में देखना सही नहीं है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में जनसंख्या नियंत्रण और वृद्धि को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।
क्या कहा जीतन राम मांझी ने?
जीतन राम मांझी ने कहा कि हर बच्चा केवल भोजन के लिए पैदा नहीं होता, बल्कि वह अपने साथ काम करने की क्षमता और सोचने की शक्ति भी लेकर आता है।
उन्होंने कहा कि यह तय करना मुश्किल है कि कोई बच्चा आगे चलकर कितना बड़ा योगदान देगा।
उनका मानना है कि समाज को इस मुद्दे पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
बागेश्वर बाबा के बयान से जुड़ा विवाद
मांझी का यह बयान उस समय आया जब बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर चर्चा चल रही थी।
बताया गया कि उन्होंने लोगों से चार संतानें पैदा करने और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित करने की बात कही थी।
हालांकि मांझी ने कहा कि उन्हें इस बयान का पूरा संदर्भ ज्ञात नहीं है, लेकिन उन्होंने जनसंख्या को लेकर संतुलित सोच रखने पर जोर दिया।
जनसंख्या को बोझ नहीं, संसाधन मानने की बात
मांझी ने कहा कि यदि सरकार रोजगार के अवसर पैदा करे और सही तरीके से शासन चलाए, तो बड़ी जनसंख्या भी देश के विकास में योगदान दे सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की जनसंख्या करीब 140 करोड़ है, लेकिन इसे केवल समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनका मानना है कि सही नीति और योजना से यह जनसंख्या एक बड़ी ताकत बन सकती है।
शिक्षा और कौशल विकास पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या बढ़ती है, तो शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
उनके अनुसार, यही तीन क्षेत्र हैं जो किसी भी देश को मजबूत बना सकते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ भी किया साझा
मांझी ने अपने बयान में ऐतिहासिक उदाहरण का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में भी भारत की जनसंख्या बड़ी थी, फिर भी देश को ‘विश्व गुरु’ कहा जाता था।
इसलिए केवल जनसंख्या के आकार को लेकर चिंता करना उचित नहीं है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
मांझी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
कुछ लोग इसे संतुलित दृष्टिकोण बता रहे हैं, तो कुछ इसे विवादास्पद मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार और देश में जनसंख्या नीति को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
