चौंकाने वाला खुलासा: साइबर ठगों का ‘मदरबोर्ड कनेक्शन’ ध्वस्त, बड़ा अपडेट

 


साइबर ठगों का ‘मदरबोर्ड कनेक्शन’ ध्वस्त, बड़ा अपडेट

कटिहार में साइबर ठगों का मदरबोर्ड कनेक्शन तब उजागर हुआ जब 9 अप्रैल 2026 को यूपी पुलिस और बिहार STF ने संयुक्त कार्रवाई की। इस ऑपरेशन में आरोपी इश्तियाक आलम को गिरफ्तार किया गया। कटिहार के रौतरा थाना क्षेत्र में हुई इस छापेमारी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को तोड़ना था। जांच में सामने आया कि साइबर ठगों का मदरबोर्ड कनेक्शन डेटा चोरी और विदेशी ठगों तक संवेदनशील जानकारी पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा था।

यह कार्रवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे साइबर अपराध के एक नए और खतरनाक तरीके का खुलासा हुआ है, जो आम लोगों की निजी जानकारी को सीधे निशाना बना रहा था।


कैसे काम करता था ‘मदरबोर्ड कनेक्शन’?

जांच में सामने आया कि आरोपी इश्तियाक आलम गांव-गांव से पुराने और खराब मोबाइल फोन बेहद कम कीमत पर खरीदता था। इसके बाद वह इन मोबाइलों को तोड़कर उनके मदरबोर्ड निकाल लेता था।

इन मदरबोर्ड्स को वह ऊंची कीमत पर बेचता था। आशंका है कि ये पुर्जे विदेशों में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाए जाते थे। वहां इन मदरबोर्ड्स से डेटा रिकवर कर बड़े स्तर पर साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जाता था।

यह तरीका इसलिए खतरनाक है क्योंकि कई लोग पुराने मोबाइल बेचते समय अपना डेटा पूरी तरह डिलीट नहीं करते।


प्लास्टिक व्यापार की आड़ में चल रहा था खेल

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी खुद को एक साधारण प्लास्टिक सामान का व्यापारी बताता था। वह फेरी वालों के साथ घूमता और प्लास्टिक के बर्तन बेचता दिखता था।

स्थानीय लोगों को कभी शक नहीं हुआ कि वही व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को “कच्चा माल” सप्लाई कर रहा है। यह मामला दिखाता है कि कैसे अपराधी आम जीवन में घुलमिलकर बड़े नेटवर्क चला रहे हैं।


पुलिस का क्या कहना है?

कटिहार के एसपी के अनुसार यह मामला सिर्फ मोबाइल पार्ट्स की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि इन मदरबोर्ड्स के जरिए डेटा चोरी कर वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराध किए जा रहे थे।

यूपी पुलिस इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए कटिहार पहुंची थी। अब इस मामले में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं और डेटा किस-किस देश तक पहुंचाया गया।


आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इस खुलासे ने एक बड़ी चिंता को सामने ला दिया है। आज के समय में हर व्यक्ति अपने मोबाइल में बैंकिंग, निजी फोटो, पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य संवेदनशील जानकारी रखता है।

इस कार्रवाई से लोगों को यह समझने में राहत मिलेगी कि पुलिस ऐसे खतरनाक नेटवर्क पर नजर बनाए हुए है, लेकिन साथ ही यह एक चेतावनी भी है।

अगर पुराना मोबाइल बिना डेटा हटाए बेचा जाता है, तो उसका दुरुपयोग हो सकता है। इसलिए लोगों को अब अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।


कैसे बचें ऐसे साइबर खतरे से?

  • पुराना मोबाइल बेचने से पहले डेटा पूरी तरह डिलीट करें
  • फैक्ट्री रीसेट जरूर करें
  • स्टोरेज को ओवरराइट करने वाले ऐप्स का उपयोग करें
  • भरोसेमंद रिसेलर को ही फोन दें
  • सिम और मेमोरी कार्ड पहले ही निकाल लें

यह छोटे-छोटे कदम आपको बड़े साइबर फ्रॉड से बचा सकते हैं।


आगे क्या?

पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों या देशों के लिंक क्या हैं।

यह मामला भारत में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है, जहां अब अपराधी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर नए तरीके अपना रहे हैं।


Source: India TV News Desk

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