बिहार के गांव बनेंगे सोलर पावर हब, हर जिले में मॉडल सोलर विलेज


 

बिहार मॉडल सोलर विलेज योजना अब राज्य के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने जा रही है। बिहार मॉडल सोलर विलेज योजना के तहत हर जिले में एक गांव को ‘मॉडल सोलर विलेज’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और बिजली की समस्या में राहत मिलेगी। इस योजना की शुरुआत के लिए 11 गांवों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, और आने वाले समय में इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

इस पहल के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण इलाकों में सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए। इससे न सिर्फ बिजली बिल में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

क्या है मॉडल सोलर विलेज योजना?

मॉडल सोलर विलेज योजना का उद्देश्य हर जिले में एक ऐसे गांव का विकास करना है, जहां अधिकतम घरों में सोलर पैनल लगे हों और ऊर्जा की जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हों।

यह योजना केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत लागू की जा रही है। इसे जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (BREDA) को दी गई है।

कैसे मिलेगा गांव को ‘मॉडल सोलर विलेज’ का दर्जा?

किसी गांव को मॉडल सोलर विलेज बनने के लिए कुछ तय मापदंडों को पूरा करना होगा। सबसे पहले, गांव की आबादी 5,000 से अधिक होनी चाहिए।

इसके बाद जिला स्तर पर एक प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें चयन समिति गांवों का मूल्यांकन करेगी। जिस गांव में सबसे ज्यादा सोलर पैनल लगाए जाएंगे, उसे मॉडल सोलर विलेज का दर्जा दिया जाएगा।

सोलर पैनल पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?

सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए आकर्षक सब्सिडी दे रही है। अगर कोई व्यक्ति 1 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाता है, तो उसे करीब 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

वहीं, 2 किलोवाट के पैनल पर लगभग 60,000 रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इससे आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना आसान हो जाएगा।

लोन सुविधा से भी मिलेगी मदद

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बैंक भी सहयोग कर रहे हैं। सोलर पैनल लगाने के लिए 2 लाख रुपये तक का लोन सिर्फ 7% ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस लोन को 7 से 8 साल में आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवार बिना आर्थिक दबाव के सोलर ऊर्जा अपना सकेंगे।

क्या है सरकार का बड़ा लक्ष्य?

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का लक्ष्य है कि साल 2026-27 तक देशभर में 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। बिहार में मॉडल सोलर विलेज इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम कदम है।

इस योजना के तहत सामुदायिक सोलर प्लांट, सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर, सोलर स्ट्रीट लाइट और सौर सिंचाई जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

गांवों की बदलेगी तस्वीर और अर्थव्यवस्था

मॉडल सोलर विलेज बनने से गांवों में बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे छोटे व्यवसाय, खेती और घरेलू कामकाज पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

साथ ही, सोलर ऊर्जा से चलने वाली सुविधाओं के कारण गांव आत्मनिर्भर बन सकेंगे और ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बना पाएंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

आज के समय में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण संकट को देखते हुए सोलर एनर्जी सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। बिहार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।

अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार के गांव पूरी तरह से हरित ऊर्जा पर आधारित हो सकते हैं।

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