बिहार में शराबबंदी पर सरकार सख्त, खत्म करने की अटकलों पर विराम


 

पटना में Bihar Liquor Ban को लेकर चल रही अटकलों पर सरकार ने साफ रुख पेश कर दिया है। Bihar Liquor Ban को समाप्त करने की चर्चाओं के बीच डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में शराबबंदी जारी रहेगी और इसे और सख्ती से लागू किया जाएगा। नई सरकार बनने के बाद नीति बदलने की संभावना पर भी उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार किया।

सरकार का स्पष्ट संदेश: शराबबंदी जारी रहेगी

डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने पटना में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राज्य की मौजूदा नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि शराबबंदी कानून पहले की तरह लागू रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट विस्तार का किसी भी नीति से कोई सीधा संबंध नहीं होता। सरकार अपनी पूर्व निर्धारित नीतियों पर ही आगे बढ़ेगी।

अनंत सिंह की मांग से पार्टी ने बनाई दूरी

जदयू विधायक अनंत सिंह द्वारा शराबबंदी खत्म करने की मांग पर भी सरकार ने दूरी बना ली है। विजय चौधरी ने कहा कि यह अनंत सिंह की व्यक्तिगत राय है, न कि पार्टी का आधिकारिक रुख।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक विधायक के बयान को पार्टी की नीति नहीं माना जा सकता। पार्टी और सरकार की अपनी अलग जिम्मेदारियां होती हैं।

सख्ती से लागू होगा कानून

सरकार ने संकेत दिए हैं कि शराबबंदी कानून को और कड़ाई से लागू किया जाएगा। डिप्टी सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही इस बारे में स्पष्ट कर चुके हैं।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जाएंगे।

शराबबंदी पर सवाल उठाने वालों को नसीहत

विजय चौधरी ने शराबबंदी कानून पर सवाल उठाने वालों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब यह कानून बना था, तब सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी नीति पर सवाल उठाने से पहले लोगों को अपने पुराने रुख पर भी विचार करना चाहिए।

2016 से लागू है शराबबंदी कानून

बिहार में वर्ष 2016 से शराब के उत्पादन, बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इस कानून का उद्देश्य सामाजिक सुधार और अपराध में कमी लाना था।

हालांकि, विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि राज्य में अवैध शराब की तस्करी अब भी जारी है।

अवैध शराब और जहरीली घटनाएं बनी चुनौती

राज्य में कई बार जहरीली शराब से मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में पूर्वी चंपारण में ऐसी घटना में कई लोगों की जान गई थी।

यह मुद्दा शराबबंदी कानून के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता रहा है।

एनडीए के भीतर भी उठे सवाल

सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेता भी समय-समय पर इस कानून की समीक्षा की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

हालांकि, सरकार ने फिलहाल स्पष्ट कर दिया है कि कानून में कोई बदलाव नहीं होगा।

क्यों अहम है यह बयान?

नई सरकार बनने के बाद नीति को लेकर जो अनिश्चितता थी, वह अब खत्म होती नजर आ रही है। सरकार ने अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है।

यह बयान प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आगे की रणनीति तय होगी।

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