बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। रविवार को मुजफ्फरपुर पुलिस ने गेमिंग एप और शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी करने वाला यह गिरोह देश के 12 राज्यों में सक्रिय था और अब तक दर्जनों लोगों को निशाना बना चुका था। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई डेबिट कार्ड, चेकबुक, मोबाइल और लैपटॉप समेत अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया है। इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
डिजिटल दौर में जहां पढ़ाई, व्यापार और प्रचार-प्रसार तेजी से ऑनलाइन हो रहा है, वहीं साइबर अपराधी भी इसी माध्यम का दुरुपयोग कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। मुजफ्फरपुर में पकड़ा गया यह गिरोह भी ऑनलाइन निवेश और गेमिंग के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करता था।
कैसे काम करता था साइबर ठगों का नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से ठगी को अंजाम देते थे। वे पहले लोगों को गेमिंग एप, शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर आकर्षित करते थे।
इसके बाद लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर उनसे पैसे निवेश करवाते थे। शुरुआत में छोटे रिटर्न दिखाकर भरोसा बनाया जाता था और फिर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाकर संपर्क तोड़ दिया जाता था।
जांच में पता चला है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था और ऑनलाइन माध्यम से लोगों को निशाना बनाता था। कई पीड़ित व्यापारी और आम लोग भी इस ठगी के शिकार हुए हैं।
आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद हुआ
मुजफ्फरपुर साइबर थाना की टीम ने जब आरोपियों को गिरफ्तार किया तो उनके पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए गए।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से:
- 14 बैंक खातों से जुड़े डेबिट कार्ड
- 11 खातों की चेकबुक
- 3 सादे चेकबुक जिनके सभी पन्नों पर पहले से हस्ताक्षर
- 9 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- पासबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड
- 5 फर्जी कंपनियों की मुहर
इन सभी सामानों का इस्तेमाल ठगी के नेटवर्क को संचालित करने के लिए किया जाता था। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है।
ग्रामीण लोगों के दस्तावेजों से खोलते थे फर्जी कंपनी
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि यह गिरोह ग्रामीण इलाकों के लोगों को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज लेकर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां खोलते थे।
इसके बाद उन कंपनियों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी करवाया जाता था ताकि बैंक खाते और वित्तीय लेनदेन को वैध दिखाया जा सके।
इन फर्जी कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और उसे निकालने के लिए किया जाता था। इस वजह से जांच एजेंसियों को असली आरोपियों तक पहुंचने में समय लग जाता था।
12 राज्यों के लोगों को बनाया शिकार
पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह देश के 12 राज्यों के करीब 30 लोगों से ठगी कर चुका है।
हालांकि पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। कई मामलों में लोग शर्म या डर की वजह से शिकायत भी दर्ज नहीं कराते हैं।
पुलिस अब बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
ऑपरेशन साइबर प्रहार के तहत बड़ी कार्रवाई
इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत ‘ऑपरेशन साइबर प्रहार’ चलाया गया।
इसी अभियान के दौरान संदिग्ध बैंक खातों की जांच में 1.18 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
वहीं, सीतामढ़ी पुलिस ने भी इसी अभियान के तहत साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़े एक अन्य आरोपी को पकड़ा है। आरोपी साइबर अपराधियों को ‘म्यूल बैंक खाते’ उपलब्ध कराता था, जिनका उपयोग ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जाता था।
पुलिस कर रही है आगे की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है।
साथ ही पुलिस बैंक खातों और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच भी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने कुल कितनी रकम की ठगी की है।
पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Source: पुलिस और मीडिया रिपोर्ट