बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले मिलेगी पूरी जानकारी, 1 अप्रैल से नया नियम लागू

 


बड़ा अपडेट: बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले मिलेगी पूरी जानकारी

Bihar Bhumi New Rule को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बिहार सरकार ने जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े विवाद कम करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। Bihar Bhumi New Rule के तहत 1 अप्रैल से जमीन की रजिस्ट्री से पहले ही खरीदार को जमीन के असली मालिक और उससे जुड़ी पूरी जानकारी मिल सकेगी। यह जानकारी रजिस्ट्री से लगभग 10 दिन पहले ई-निबंधन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से फर्जी रजिस्ट्री और जमीन विवादों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।

नई व्यवस्था को लागू करने के लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।


क्या है बिहार सरकार का नया नियम

बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान अक्सर मालिकाना हक और दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई मामलों में खरीदार को बाद में पता चलता है कि जमीन का असली मालिक कोई और है या उस पर पहले से विवाद चल रहा है।

इन समस्याओं को कम करने के लिए राज्य सरकार ने नई प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत अब रजिस्ट्री से पहले ही जमीन के मालिकाना हक और उससे जुड़ी अन्य जानकारी की जांच की जाएगी।

इस व्यवस्था के जरिए खरीदार पहले ही तय कर सकेगा कि उसे जमीन खरीदनी है या नहीं।


ई-निबंधन पोर्टल से मिलेगी पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत जमीन से जुड़ी जानकारी ई-निबंधन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी।

क्रेता और विक्रेता को सबसे पहले पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद वे लॉगिन कर जमीन से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज करेंगे।

जब आवेदक ‘भूमि के बारे में पूरी जानकारी’ का विकल्प चुनेगा, तो संबंधित अंचल कार्यालय को स्वतः सूचना भेज दी जाएगी। इसके बाद अधिकारी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू करेंगे।


पोर्टल पर दर्ज करनी होगी ये जानकारी

ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन करते समय कई जरूरी जानकारियां भरनी होंगी।

इनमें शामिल हैं:

  • निबंधन कार्यालय का नाम
  • अंचल और मौजा का नाम
  • थाना का विवरण
  • खाता और खेसरा संख्या
  • जमाबंदी संख्या
  • भूमि का रकबा
  • चौहद्दी
  • जमीन का प्रकार
  • क्रेता और विक्रेता का विवरण

इन सभी जानकारियों के आधार पर अंचल कार्यालय जमीन की स्थिति और मालिकाना हक की जांच करेगा।


10 दिनों के भीतर देनी होगी रिपोर्ट

नई प्रणाली के तहत अंचलाधिकारी और राजस्व पदाधिकारी को जमीन से संबंधित जांच पूरी करनी होगी।

पोर्टल से सूचना मिलने के बाद अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर जमीन की अद्यतन रिपोर्ट अपलोड करनी होगी।

इस रिपोर्ट में जमीन के असली मालिक, रिकॉर्ड की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी। इसके बाद आवेदक यह जानकारी देखकर फैसला कर सकेगा कि रजिस्ट्री करानी है या नहीं।


जमीन विवाद कम करने में मिल सकती है मदद

सरकार का मानना है कि यह नई व्यवस्था जमीन विवादों को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है।

अक्सर लोग अधूरी जानकारी के आधार पर जमीन खरीद लेते हैं और बाद में कानूनी विवादों में फंस जाते हैं। नई प्रक्रिया से खरीदार पहले ही जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर सकेगा।

इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर भी रोक लग सकती है।


अंचल कार्यालयों पर बढ़ सकता है काम का दबाव

हालांकि इस नई व्यवस्था से प्रशासनिक स्तर पर काम का दबाव भी बढ़ सकता है।

बिहार के 141 रजिस्ट्री कार्यालयों में हर दिन औसतन 6 से 7 हजार दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती है। पीक सीजन में यह संख्या 8 हजार से अधिक तक पहुंच जाती है।

यदि इन आवेदनों में से आधे लोग भी इस सुविधा का उपयोग करते हैं, तो अंचल कार्यालयों को रोज हजारों जमीनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

इस वजह से अधिकारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है, लेकिन सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।


डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

राज्य सरकार लगातार जमीन से जुड़े कामों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रही है।

ई-निबंधन पोर्टल के जरिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को पहले ही ऑनलाइन किया जा चुका है। अब जमीन की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने की यह नई व्यवस्था उस दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार में जमीन से जुड़े विवादों में काफी कमी आ सकती है।


Source: बिहार सरकार / निबंधन विभाग की जानकारी

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