होलिका दहन 2026 मुहूर्त को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। क्या है खास? इस बार शुभ समय केवल 12 मिनट का रहेगा। कब? 2 मार्च 2026, सोमवार। कहां? देशभर में फाल्गुन पूर्णिमा पर। किसने बताया? ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने। क्यों महत्वपूर्ण? क्योंकि पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है। कैसे करें पूजा? निर्धारित मुहूर्त में विधि-विधान से। होलिका दहन 2026 मुहूर्त शाम 6:24 बजे से 6:36 बजे तक रहेगा, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना होगा।
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। धुलंडी 3 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी।
सिर्फ 12 मिनट का शुभ मुहूर्त
डॉ. अनीष व्यास के अनुसार इस वर्ष प्रदोष काल का पारंपरिक लाभ उपलब्ध नहीं रहेगा। इसलिए होलिका दहन का श्रेष्ठ समय 2 मार्च को सूर्यास्त के बाद केवल 12 मिनट तय किया गया है।
शाम 6:24 से 6:36 बजे के बीच ही होलिका दहन करना शुभ माना गया है।
मुहूर्त छोटा होने के कारण श्रद्धालुओं को पहले से तैयारी रखने की सलाह दी गई है।
चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग
3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा।
पूर्णिमा और ग्रहण का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रहण के कारण 3 मार्च को दान-पुण्य और स्नान का महत्व भी बढ़ जाएगा।
हरि-हर पूजा क्यों है जरूरी?
फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन के साथ हरि-हर पूजा का विधान बताया गया है। हरि यानी भगवान विष्णु और हर यानी भगवान शिव।
मान्यता है कि प्रह्लाद की रक्षा विष्णु भक्ति से हुई थी। इसलिए विष्णु पूजन की परंपरा है।
साथ ही शिव पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन दोनों देवों की संयुक्त आराधना करने से शुभ फल मिलता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व
पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना गया है।
जल में दूध मिलाकर अर्घ्य देने के बाद अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करने चाहिए।
धूप-दीप दिखाकर आरती करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।
अग्नि की दिशा बताएगी साल का संकेत
होलिका दहन के दौरान अग्नि और धुएं की दिशा को भी शुभ-अशुभ संकेत से जोड़ा जाता है।
🔥 आग सीधी ऊपर उठे
अगर लौ सीधे आसमान की ओर जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना गया है।
सत्ता, प्रशासन और समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत मिलता है।
🔥 पूर्व दिशा
लौ पूर्व की ओर झुके तो शिक्षा, अध्यात्म और रोजगार में वृद्धि के संकेत मिलते हैं।
मान-सम्मान और सेहत में सुधार की संभावना रहती है।
🔥 पश्चिम दिशा
आग पश्चिम की ओर हो तो आर्थिक प्रगति धीरे-धीरे होती है।
पशुधन को लाभ मिलता है, लेकिन प्राकृतिक चुनौतियां हल्की रह सकती हैं।
🔥 उत्तर दिशा
उत्तर दिशा की ओर झुकी लौ सुख-शांति और समृद्धि का संकेत मानी जाती है।
चिकित्सा, व्यापार और कृषि में उन्नति की संभावना रहती है।
🔥 दक्षिण दिशा
दक्षिण की ओर झुकाव को अशुभ माना गया है।
झगड़े, विवाद और रोग बढ़ने की आशंका व्यक्त की जाती है।
कैसे करें होलिका दहन की तैयारी?
- मुहूर्त से पहले लकड़ी और उपले व्यवस्थित रखें।
- पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें।
- परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करें।
- अग्नि प्रज्वलित करते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।
छोटा मुहूर्त होने के कारण समय प्रबंधन जरूरी है।
होलिका दहन 2026 मुहूर्त इस बार खास खगोलीय संयोग के कारण चर्चा में है। 12 मिनट का सीमित समय, चंद्र ग्रहण और हरि-हर पूजा का महत्व इसे और विशेष बनाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा करने पर सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकेत प्राप्त होते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले योग्य विद्वान या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
Source: ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास द्वारा दी गई जानकारी
