बड़ा अपडेट: बिहार के अगले CM पर चर्चा तेज, शिवानंद तिवारी ने लिया सम्राट का नाम

 


बिहार के अगले CM को लेकर सियासी चर्चा तेज

बिहार के अगले CM को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। रविवार को वरिष्ठ समाजवादी नेता Shivanand Tiwari ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बिहार के अगले CM भारतीय जनता पार्टी से हो सकते हैं और इस दौड़ में Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे दिखाई देता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब यह चर्चा चल रही है कि वर्तमान मुख्यमंत्री Nitish Kumar भविष्य में राज्यसभा जा सकते हैं। तिवारी ने अपने पोस्ट में तीन प्रमुख कारण गिनाते हुए बताया कि क्यों सम्राट चौधरी को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बिहार की राजनीति में यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं और राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस शुरू कर सकता है।


शिवानंद तिवारी ने क्यों लिया सम्राट चौधरी का नाम

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शिवानंद तिवारी ने कहा कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठेगा कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा।

तिवारी के अनुसार, वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा में जिस तरह की भूमिका अभी सम्राट चौधरी निभा रहे हैं, उससे उनका नाम सबसे आगे दिखता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पहले बिहार में भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन अब केवल एक उपमुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। इसे भी उन्होंने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत बताया।


पहला कारण: उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री की भूमिका

शिवानंद तिवारी के मुताबिक सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बिहार की राजनीति में गृह विभाग को काफी अहम माना जाता है।

उनका कहना है कि किसी भी राज्य में कानून-व्यवस्था का विभाग सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक होता है। ऐसे में यह जिम्मेदारी किसी प्रभावशाली नेता को ही दी जाती है।

तिवारी के अनुसार यही वजह है कि सम्राट चौधरी को संभावित मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।


दूसरा कारण: राजनीतिक संकेत और सार्वजनिक समर्थन

शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सम्राट चौधरी के प्रति व्यवहार भी राजनीतिक संकेत दे रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्णिया में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आगे बढ़ाया था। इसे उन्होंने एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश बताया।

उनके अनुसार यह संभव है कि नीतीश कुमार अपने संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें स्थापित करने का प्रयास कर रहे हों।


तीसरा कारण: सामाजिक समीकरण

शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में बिहार की राजनीति के सामाजिक समीकरणों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बिहार में लंबे समय से “लव-कुश” यानी कुर्मी और कुशवाहा समुदाय का राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

उनके मुताबिक यह गठजोड़ पहले समता पार्टी के समय से ही मजबूत होता गया। इसी सामाजिक आधार के सहारे कई वर्षों तक सत्ता की राजनीति प्रभावित होती रही है।

तिवारी का कहना है कि अगर सम्राट चौधरी को आगे लाया जाता है तो यह उसी सामाजिक समीकरण को बनाए रखने की रणनीति भी हो सकती है।


समता पार्टी और पुराने राजनीतिक समीकरण

अपने पोस्ट में शिवानंद तिवारी ने बिहार की राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में जब लालू यादव के साथ रहना संभव नहीं रहा, तब एक वैकल्पिक राजनीतिक गठबंधन की जरूरत महसूस हुई।

इसी दौर में समता पार्टी का गठन हुआ। तिवारी के अनुसार 1994 में पटना के गांधी मैदान में इसकी घोषणा की गई थी।

उस समय पार्टी का लक्ष्य कुर्मी, कुशवाहा और अति पिछड़े वर्गों को साथ लेकर एक नया सामाजिक-राजनीतिक गठबंधन बनाना था।


लव-कुश समीकरण का प्रभाव

तिवारी का कहना है कि यह “लव-कुश” समीकरण बाद में भी बिहार की राजनीति में प्रभावी बना रहा। इसी आधार पर कई चुनावी रणनीतियां तैयार की गईं।

उनका मानना है कि अगर भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो इस सामाजिक आधार को बनाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाया जाता है तो इसे कुशवाहा समाज के प्रति राजनीतिक सम्मान के रूप में भी देखा जा सकता है।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के विभिन्न जिलों में “समृद्धि यात्रा” के दौरान लगातार कार्यक्रम कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में कई नए समीकरण बन सकते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनडीए नेतृत्व भविष्य की रणनीति किस तरह तय करता है।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स / सोशल मीडिया पोस्ट

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