चौंकाने वाला बयान: शराबबंदी सवाल पर भड़के सभापति, बोले- पीने का मन है क्या?

 


बिहार शराबबंदी पर सवाल और सभापति की तीखी प्रतिक्रिया

बिहार शराबबंदी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। शनिवार को आरा में मीडिया से बातचीत के दौरान Awadhesh Narayan Singh से बिहार शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और पत्रकारों से ही सवाल कर दिया—“पीने का मन है क्या आपको?” यह घटना उस समय हुई जब सारण जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर पत्रकारों ने उनसे प्रतिक्रिया मांगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

घटना के समय वह एक निजी संस्थान के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आरा पहुंचे थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मीडिया ने उनसे हाल के घटनाक्रम पर सवाल किए, जिसके दौरान यह विवादित टिप्पणी सामने आई।

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत

शनिवार को आरा में आयोजित एक कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम के समापन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की।

इसी दौरान मीडिया ने उनसे सारण जिले में हाल के दिनों में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बारे में सवाल पूछा। पत्रकारों ने यह भी जानना चाहा कि क्या शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत है।

इस सवाल पर सभापति ने कहा कि पहले की तुलना में ऐसी घटनाएं काफी कम हो गई हैं। उनके मुताबिक राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद कई सामाजिक समस्याओं में कमी आई है।

“शराब अपने आप में जहर है”

बातचीत के दौरान अवधेश नारायण सिंह ने शराब के दुष्प्रभावों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शराब खुद में जहर है और इसे पीने से ही लोगों की मौत होती है।

उनके अनुसार शराबबंदी लागू होने के बाद समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। पहले शराब पीकर झगड़े और पारिवारिक विवाद आम बात थी, लेकिन अब ऐसी घटनाओं में कमी आई है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार के उद्देश्य से शराबबंदी लागू की थी और यह फैसला आज भी सही साबित हो रहा है।

समीक्षा के सवाल पर नाराजगी

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की जानी चाहिए, तो सभापति इस सवाल से नाराज नजर आए।

उन्होंने कहा कि समीक्षा क्यों होनी चाहिए। उनका कहना था कि शराब एक खराब चीज है और इससे समाज को नुकसान होता है। इसलिए इस पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों से ही पूछ लिया—“पीने का मन है क्या आपको?” यह बयान सुनकर वहां मौजूद लोग कुछ समय के लिए चुप हो गए और माहौल थोड़ा असहज हो गया।

“बताइए कहां मिल रही है शराब”

मीडिया बातचीत के दौरान पत्रकारों ने यह भी मुद्दा उठाया कि राज्य के कई इलाकों में शराब मिलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

इस पर सभापति ने कहा कि यदि कहीं भी खुलेआम शराब बिक रही है तो इसकी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सूचना मिले तो कार्रवाई तुरंत की जा सकती है।

उन्होंने कहा, “बताइए कहां मिल रही है शराब… शाम तक पकड़वा दूंगा।” उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि प्रशासन ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए तैयार है।

बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा

सभापति के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुछ लोग इसे भावनात्मक प्रतिक्रिया बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की तीखी टिप्पणी मान रहे हैं।

हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान को संभालने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक यह टिप्पणी चर्चा का विषय बन चुकी थी।

जहरीली शराब की घटनाओं के बाद फिर बहस

हाल के दिनों में सारण जिले में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर बहस फिर तेज हो गई।

एक तरफ सरकार इसे सामाजिक सुधार का बड़ा कदम बताती है, वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठन इसके प्रभाव और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी जैसे बड़े कानून की सफलता काफी हद तक उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसलिए समय-समय पर समीक्षा और प्रशासनिक सुधार की चर्चा भी सामने आती रहती है।

आगे क्या हो सकता है

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में शराबबंदी केवल एक कानून नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है।

ऐसे में जहरीली शराब की घटनाएं या प्रशासनिक चुनौतियां सामने आने पर बहस तेज होना स्वाभाविक है। आने वाले समय में सरकार और प्रशासन दोनों के लिए यह चुनौती बनी रहेगी कि कानून का उद्देश्य और उसका प्रभाव दोनों संतुलित रहें।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स

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