छुट्टी के दिन स्कूल खुला, चावल ले जाते पकड़ी गई रसोइया? मचा हंगामा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के बाढ़ में मिड-डे मील चावल को लेकर विवाद सामने आया है। मिड-डे मील चावल को लेकर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 2 अक्टूबर की सार्वजनिक छुट्टी के बावजूद मासूमगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय खोला गया और वहां से चावल बाहर ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने रसोइया को चावल के साथ रोकने और घटना का वीडियो बनाने का दावा किया है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने जांच की मांग की है। हालांकि, चावल की बिक्री के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
छुट्टी के दिन स्कूल खुलने का क्या है मामला?
मासूमगंज प्राथमिक विद्यालय में 2 अक्टूबर को स्कूल खोले जाने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय ग्रामीण दीपक कुमार के अनुसार, सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद विद्यालय में गतिविधि हो रही थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका ने स्कूल में रखा एमडीएम का चावल रसोइया को दिया। इसके बाद रसोइया कथित तौर पर चावल लेकर एक दुकान की तरफ गई, जहां उसे बेचने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया गया।
जानकारी मिलने पर कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने रसोइया को रोककर पूछताछ की और पूरी घटना का वीडियो बनाने का दावा किया। ग्रामीणों के मुताबिक, वीडियो बनता देखकर प्रधानाध्यापिका वहां से चली गईं।
चावल को लेकर मौके पर बढ़ा विवाद
चावल ले जाने को लेकर ग्रामीणों और रसोइया के बीच बातचीत के दौरान मामला गर्म हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, रसोइया का बेटा भी मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों से उसकी बहस हो गई।
बताया गया कि विवाद के दौरान हाथापाई की स्थिति भी बनी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो ग्रामीणों द्वारा बनाए जाने की बात सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल से अनाज बाहर ले जाने को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, इन पुराने आरोपों की भी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
बच्चे ने 9 बोरा चावल ले जाने का भी किया दावा
मामले में एक स्थानीय स्कूली बच्चे का बयान भी सामने आया है। बच्चे ने दावा किया कि कुछ दिन पहले ई-रिक्शा से करीब नौ बोरा चावल स्कूल से बाहर ले जाया गया था।
बच्चे के इस दावे के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय में रखे एमडीएम अनाज के इस्तेमाल और उसकी निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय वार्ड सदस्य ने भी कहा कि विद्यालय से अनाज से जुड़ी शिकायतें पहले सामने आती रही हैं। लेकिन नौ बोरा चावल ले जाने या किसी अनियमितता की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच जरूरी होगी।
रसोइया ने दी अलग सफाई, बोली- मजदूरी में मिला था चावल
ग्रामीणों के आरोपों के बीच रसोइया ने अलग पक्ष रखा। उसका कहना था कि वह 2 अक्टूबर को स्कूल में सफाई करने गई थी।
रसोइया के मुताबिक, सफाई के बदले प्रधानाध्यापिका ने उसे एक बोरा चावल दिया था। उसने यह भी दावा किया कि चावल खराब था और खाने योग्य नहीं था।
उसके अनुसार, इसी वजह से वह उस चावल को बाजार में बेचने के लिए ले जा रही थी। इस दावे की भी संबंधित विभाग की ओर से अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल उसे किस आधार पर दिया गया था और वह सरकारी एमडीएम स्टॉक का हिस्सा था या नहीं।
ग्रामीणों ने उठाए स्कूल की व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। लोगों ने स्कूल में रखे एमडीएम अनाज के रिकॉर्ड, स्टॉक और उसके वितरण की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का मुख्य सवाल यह है कि अगर 2 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश था तो विद्यालय में गतिविधि क्यों हुई और स्कूल से चावल बाहर ले जाने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
यदि जांच में सरकारी योजना के तहत उपलब्ध अनाज के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा सकती है। फिलहाल आरोपों को जांच का विषय माना जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग का पक्ष क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम शिक्षा विभाग की जांच होगी। इससे यह पता चल सकता है कि 2 अक्टूबर को विद्यालय खोलने का कोई आधिकारिक कारण था या नहीं।
इसके अलावा स्कूल के एमडीएम स्टॉक रजिस्टर, चावल की उपलब्ध मात्रा, पिछले दिनों के वितरण और छुट्टी वाले दिन स्कूल में मौजूद गतिविधियों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से मामले में पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसलिए फिलहाल विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
मासूमगंज प्राथमिक विद्यालय का यह मामला फिलहाल ग्रामीणों के आरोप, रसोइया के जवाब और मौके पर सामने आए घटनाक्रम तक सीमित है।
एक तरफ ग्रामीण चावल की कथित बिक्री और पहले भी अनाज बाहर ले जाने की शिकायतों की जांच चाहते हैं। दूसरी तरफ रसोइया ने सफाई के बदले चावल मिलने की बात कही है।
ऐसे में स्कूल का रिकॉर्ड, एमडीएम स्टॉक और संबंधित अधिकारियों की जांच इस पूरे मामले में सबसे अहम होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल को बाहर ले जाने की वजह क्या थी और किसी नियम का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
