वैशाली : नशा कारोबार से कथित सांठगांठ पर एक्शन, 9 पुलिसकर्मी निलंबित
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के वैशाली जिले से पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। वैशाली जिले के महनार थाना क्षेत्र में सूखा नशा कारोबार से कथित सांठगांठ और बरामदगी की प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों के बाद थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई की पुष्टि ग्रामीण एसपी सोनू कुमार राय ने की है।
एक ही थाने से जुड़े पुलिस पदाधिकारियों और चौकीदारों पर हुई इस कार्रवाई के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई है। पुलिस मुख्यालय स्तर की जांच में कई बिंदुओं की पड़ताल की गई थी।
महनार में थानेदार समेत 9 पर कार्रवाई
मामला वैशाली के महनार थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय की जांच के बाद थानाध्यक्ष वेदानंद सिंह समेत कुल नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई में थानाध्यक्ष, डायल-112 से जुड़े अधिकारी, एएसआई, सिपाही और चौकीदार शामिल हैं। विभागीय कार्रवाई का मुख्य आधार सूखा नशा कारोबारियों के साथ कथित संबंध और पुलिस कार्रवाई के दौरान बरामद सामान से जुड़ी अनियमितताओं को बताया गया है।
हालांकि, निलंबन की कार्रवाई को आरोपों की जांच के दौरान उठाया गया विभागीय कदम माना जाना चाहिए। इससे संबंधित कर्मियों के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध हो गए हैं, ऐसा निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता।
लावापुर में छापेमारी के बाद शुरू हुई जांच
बताया गया है कि महनार थाना क्षेत्र के लावापुर गांव में एक कथित सूखा नशा कारोबारी के ठिकाने पर पुलिस ने छापेमारी की थी।
छापेमारी के दौरान नशीले पदार्थों से जुड़ी सामग्री और नकदी मिलने की बात सामने आई। इसके बाद बरामद सामान और रकम को लेकर तैयार की गई जब्ती सूची की जांच शुरू हुई।
आरोप है कि बरामद वास्तविक रकम की तुलना में जब्ती सूची में कम राशि दर्ज की गई। इसके अलावा छापेमारी में मिले कुछ अन्य सामानों को भी सूची में सही तरीके से दर्ज नहीं किए जाने की बात जांच में सामने आई।
इसी बिंदु ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया और पुलिस मुख्यालय स्तर पर इसकी विस्तृत जांच की गई।
पीली डायरी और CCTV फुटेज की भी जांच
जांच के दौरान सिर्फ कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहा गया। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने कई तरह के साक्ष्यों की पड़ताल की।
इनमें पीली डायरी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और CCTV फुटेज जैसे साक्ष्य शामिल बताए गए हैं। इन रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और कथित नशा कारोबारियों से उनके संपर्क की जांच की गई।
प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक विभागीय जांच में आरोपों को सही पाए जाने के बाद नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
अब जांच का अगला चरण इस बात पर केंद्रित हो सकता है कि कथित नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका थी और पुलिसकर्मियों से उनके संपर्क की प्रकृति क्या थी।
किन पुलिसकर्मियों को किया गया निलंबित?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार निलंबित किए गए लोगों में ये नाम शामिल हैं:
- वेदानंद सिंह — महनार थानाध्यक्ष
- डायल-112 प्रभारी
- राजेश कुमार — एएसआई
- राजीव कुमार — सिपाही
- निशा कुमारी — महिला सिपाही
- रौशन कुमार — चौकीदार
- राजन पासवान — चौकीदार
- रघुनाथ कुशवाहा — चौकीदार
- पुतलेश कुमार — चौकीदार
एक साथ नौ कर्मियों पर कार्रवाई होने से मामला सामान्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से बड़ा माना जा रहा है। पुलिस विभाग अब इस पूरे प्रकरण में आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर नजर रख रहा है।
400 करोड़ रुपये जैसी बात सामने आई है?
इस मामले से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में नशा कारोबार और पुलिसकर्मियों के कथित संबंधों की जांच का उल्लेख है। हालांकि, सोशल या अन्य चर्चाओं में सामने आने वाले हर आर्थिक दावे को आधिकारिक तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसलिए किसी भी कथित रकम, लेनदेन या आर्थिक नेटवर्क की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट और दस्तावेज जरूरी होंगे।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में विभागीय कार्रवाई का आधार मुख्य रूप से कथित सांठगांठ और छापेमारी के दौरान बरामदगी से जुड़ी अनियमितताओं को बताया गया है।
क्या अब नशा कारोबार के नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?
नौ पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि महनार में कथित सूखा नशा कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है।
जांच में यदि पुलिसकर्मियों और कारोबारियों के बीच संपर्क के और प्रमाण सामने आते हैं, तो अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
वैशाली पुलिस पहले भी अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चला चुकी है। हाल की एक कार्रवाई में जिले में एनडीपीएस एक्ट समेत अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारियां और गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी की जानकारी पुलिस ने दी थी।
ऐसे में महनार प्रकरण की जांच का असर सिर्फ निलंबित पुलिसकर्मियों तक सीमित रहता है या कथित नशा नेटवर्क तक पहुंचता है, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।
पुलिस विभाग के लिए भी बड़ा सवाल
महनार में थानेदार से लेकर सिपाही और चौकीदार तक नौ लोगों पर कार्रवाई ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
खास तौर पर जब किसी छापेमारी में बरामद सामान और रकम की जब्ती सूची पर सवाल उठें, तो रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया की निष्पक्षता महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल विभागीय जांच के आधार पर निलंबन हुआ है। आगे की जांच में यदि कोई अतिरिक्त तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर अलग कार्रवाई हो सकती है।
इस मामले में अब लोगों की नजर पुलिस मुख्यालय की अगली कार्रवाई और जांच के अंतिम निष्कर्ष पर है।
