निशांत कुमार को CM बनाने की मांग, विनय चौधरी ने कही बड़ी बात
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👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना में JDU Meeting के बाद बिहार की राजनीति में निशांत कुमार को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। JDU Meeting के बाद विधायक विनय कुमार चौधरी ने ऐसा बयान दिया, जिसने पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि निशांत कुमार कल ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लें।
हालांकि, यह विनय कुमार चौधरी की व्यक्तिगत इच्छा और राजनीतिक बयान है। जदयू की ओर से निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
पटना में जदयू की अहम बैठक में क्या हुआ?
शुक्रवार को पटना स्थित जदयू कार्यालय में पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रबोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बैठक की अध्यक्षता जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की। उनके साथ कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए विधायकों और विधान पार्षदों को सदन की कार्यप्रणाली की जानकारी देना था। इसमें प्रश्नकाल, बजट, विधायी प्रक्रिया और सदन में जनता से जुड़े मुद्दे प्रभावी तरीके से उठाने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।
जदयू की ओर से इसे संगठन और जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया है।
विनय चौधरी ने निशांत को लेकर क्या कहा?
बैठक के बाद जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी से जब निशांत कुमार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अपनी इच्छा खुलकर सामने रखी।
उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि निशांत कुमार को अगले ही दिन मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी जाए। साथ ही उन्होंने निशांत कुमार को पार्टी का नेता बताते हुए कहा कि आने वाले समय में जदयू का नेतृत्व उनके हाथों में जाने की बात को वह स्वीकार करते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार की राजनीतिक भूमिका और जदयू के भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
हालांकि, निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा इस बयान से नहीं हुई है। इसलिए विनय चौधरी के बयान को पार्टी के औपचारिक फैसले के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
क्या निशांत कुमार बनेंगे जदयू के अगले नेता?
निशांत कुमार का नाम पिछले कुछ समय से जदयू के भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चा में है। पार्टी के कई नेता सार्वजनिक तौर पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सकारात्मक बयान दे चुके हैं।
बैठक में भी जदयू नेता नीरज कुमार ने निशांत कुमार को पार्टी का सम्मानित नेता बताया और कहा कि उन्हें पार्टी के भविष्य के रूप में स्वीकार किया गया है।
दूसरी ओर, पार्टी स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इससे साफ है कि नेताओं के व्यक्तिगत बयानों और संगठन के आधिकारिक फैसले के बीच अंतर बना हुआ है।
यही वजह है कि निशांत कुमार को लेकर सामने आने वाले हर बयान पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
नाम बदलने के सवाल पर भी दिया जवाब
विनय कुमार चौधरी से जदयू के नाम में बदलाव को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या अभी जदयू का मतलब नीतीश कुमार नहीं है।
उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के नाम या संगठनात्मक बदलाव से जुड़े फैसले प्रक्रिया के तहत ही होंगे। इससे पहले भी पार्टी की ओर से कहा गया है कि इस तरह के औपचारिक बदलाव के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इसलिए नाम बदलने की चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों और संगठनात्मक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार और निशांत के बीच क्या है समीकरण?
निशांत कुमार हाल के महीनों में जदयू के सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आए हैं। 18 सितंबर की बैठक में भी वह नीतीश कुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच पर मौजूद रहे।
यह उपस्थिति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जदयू में नीतीश कुमार के बाद नेतृत्व को लेकर राजनीतिक चर्चा पहले से चल रही है।
लेकिन किसी नेता की बैठक में मौजूदगी या किसी विधायक के बयान को अपने आप में नेतृत्व परिवर्तन की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।
ललन सिंह और अनंत सिंह की गैरमौजूदगी भी चर्चा में
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और मोकामा विधायक अनंत सिंह की गैरमौजूदगी की भी चर्चा हुई।
हालांकि, पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम मुख्य रूप से विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए था। इसलिए किसी नेता की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जाने के बावजूद इसका आधिकारिक कारण इसी कार्यक्रम के स्वरूप से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
विनय कुमार चौधरी के बयान ने निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी और गठबंधन की औपचारिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल तस्वीर इतनी है कि निशांत कुमार जदयू के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय हैं और पार्टी के कुछ नेता उन्हें भविष्य के नेतृत्व से जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं, नीतीश कुमार अभी भी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और 18 सितंबर की बैठक की अध्यक्षता उन्होंने ही की। इसलिए निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात को अभी एक विधायक की राजनीतिक इच्छा और बयान के रूप में देखना चाहिए, न कि मुख्यमंत्री पद पर तय फैसले के रूप में।
बिहार की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में जदयू नेतृत्व को लेकर कोई औपचारिक घोषणा होती है या निशांत कुमार की भूमिका फिलहाल पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों तक ही सीमित रहती है।
