हाजीपुर सभापति संगीता कुमारी पर जांच तेज, PMAY और संपत्ति के आरोप
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हाजीपुर नगर परिषद की सभापति संगीता कुमारी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति और प्रधानमंत्री आवास योजना यानी PMAY के लाभ से संबंधित मामले में जांच तेज हो गई है। संगीता कुमारी के खिलाफ पूर्व वार्ड सदस्य सुभाष कुमार निराला की शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू की गई है। वैशाली जिला प्रशासन ने मामले की बिंदुवार जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। टीम को शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
शिकायत में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
मामला हाजीपुर नगर परिषद के पूर्व वार्ड सदस्य सुभाष कुमार निराला की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में सभापति पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति खरीदे जाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि सभापति से जुड़े लोगों के नाम पर संपत्ति खरीद और अन्य वित्तीय लेनदेन हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी प्रशासनिक जांच चल रही है और जांच पूरी होने से पहले इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
शिकायत में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी यानी PMAY-U के लाभ को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत में सभापति की सास सुरतिया देवी के नाम पर योजना के तहत करीब 1.5 लाख रुपये के लाभ का दावा किया गया है। साथ ही जमीन और मकान से जुड़े अन्य आरोप भी शिकायत में शामिल हैं।
वैशाली डीएम ने गठित की पांच सदस्यीय जांच टीम
मामले को गंभीरता से लेते हुए वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। रिपोर्टों के मुताबिक समिति की अध्यक्षता सहायक समाहर्ता कर रहे हैं।
जांच टीम में राजस्व, निबंधन और कोषागार से जुड़े अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य शिकायत में लगाए गए अलग-अलग आरोपों की दस्तावेजों के आधार पर जांच करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, जिला प्रशासन ने जांच टीम को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जांच में शिकायत से जुड़े दस्तावेज, संपत्ति का विवरण और योजना से संबंधित रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने जांच टीम के सामने पेश किए दस्तावेज
जांच के दौरान शिकायतकर्ता सुभाष कुमार निराला को भी अपने पक्ष में उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया। उन्होंने जांच समिति के सामने शिकायत से संबंधित कागजात पेश किए हैं।
अब जांच टीम इन दस्तावेजों की आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि करेगी। संपत्ति के दस्तावेज, जमीन की खरीद, योजना का लाभ और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी शिकायत में आरोप लगाए जाने और जांच में आरोप साबित होने के बीच अंतर होता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामला जांच के चरण में है।
PMAY को लेकर क्यों उठे सवाल?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने में आर्थिक सहायता देना है। हाजीपुर मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सभापति की सास के नाम पर योजना का लाभ लिया गया।
रिपोर्टों में शिकायत के हवाले से जमीन की खरीद और मकान निर्माण से जुड़े अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं। इन दावों की जांच के लिए संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि योजना का लाभ नियमों के विरुद्ध लिया गया। इसका निर्धारण जांच में उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रशासनिक निष्कर्ष के आधार पर होगा।
जांच रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम जांच समिति की रिपोर्ट होगी। समिति शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करेगी।
यदि जांच में किसी आरोप की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है। वहीं यदि किसी आरोप की पुष्टि नहीं होती है, तो उस स्थिति को भी जांच रिपोर्ट में दर्ज किया जाएगा।
फिलहाल हाजीपुर नगर परिषद और वैशाली के प्रशासनिक हलकों में इस जांच को लेकर चर्चा है। सभापति संगीता कुमारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
हाजीपुर नगर परिषद से जुड़ा मामला क्यों अहम?
हाजीपुर नगर परिषद वैशाली जिले की प्रमुख शहरी स्थानीय निकाय संस्था है। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार हाजीपुर नगर परिषद में 45 वार्ड हैं।
नगर परिषद से जुड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक शिकायत की जांच में सरकारी रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में आरोपों के बजाय जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक दस्तावेज ही अंतिम स्थिति स्पष्ट करते हैं।
फिलहाल निगाहें पांच सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और आगे प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।
