मुखिया का ऑनलाइन फंड कैसे चेक करें?
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बिहार के गांवों में एक कहानी बहुत आम है। चुनाव के वक्त वादों की झड़ी लग जाती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जब गांव में सड़क, नाली या कुएं की मरम्मत की बात आती है, तो मुखिया जी या वार्ड सदस्य का एक ही रटा-रटाया जवाब होता है— "अभी सरकार की तरफ से फंड नहीं आया है।"
पटना से लेकर बिहार के हर छोटे-बड़े जिले की जमीनी हकीकत कवर करते हुए, मैंने एक बात साफ तौर पर महसूस की है कि हमारे गांव के लोग आज भी अपने हक़ को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। गांव में कोई काम पेपर पर हो जाता है, पैसे निकाल लिए जाते हैं, लेकिन जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी जाती। क्या आपको पता है कि अब आप अपने मोबाइल से, घर बैठे यह चेक कर सकते हैं कि आपके पंचायत में सरकार ने किस काम के लिए कितना पैसा भेजा और वह पैसा कहाँ खर्च हुआ?
जी हाँ, भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने eGramSwaraj (ई-ग्राम स्वराज) नाम का एक पोर्टल और ऐप लॉन्च किया है। आज मैं आपको बिल्कुल आसान भाषा में समझाऊंगा कि कैसे आप इस पोर्टल का इस्तेमाल करके अपने पंचायत के विकास कार्यों और फंड की एक-एक पाई का हिसाब ऑनलाइन निकाल सकते हैं।
eGramSwaraj पोर्टल असल में है क्या?
पहले के समय में पंचायत का सारा हिसाब-किताब एक मोटे रजिस्टर में होता था, जिसे 'पंचायत सचिव' (Panchayat Sevak) अपने पास ताले में बंद करके रखते थे। आम आदमी को यह जानकारी कभी नहीं मिल पाती थी कि 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) या राज्य वित्त आयोग से गांव में कितना पैसा आया है।
इस भ्रष्टाचार और लेटलतीफी को खत्म करने के लिए सरकार ने eGramSwaraj पोर्टल बनाया। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहाँ देश भर की हर ग्राम पंचायत को अपना ऑनलाइन रिपोर्ट कार्ड रखना पड़ता है।
इस पोर्टल पर मुख्य रूप से 3 चीजों की जानकारी मिलती है:
प्लानिंग (Planning): इस साल पंचायत में क्या-क्या काम होने वाले हैं (जैसे- पीसीसी सड़क, छठ घाट का निर्माण, कुएं का जीर्णोद्धार)।
एकाउंटिंग (Accounting): किस काम के लिए कितना फंड (रुपया) जारी किया गया है।
प्रोग्रेस (Progress): वह काम अभी शुरू हुआ है, चल रहा है, या पूरा होकर उसका पैसा निकाला जा चुका है।
कौन-कौन से फंड की जानकारी मिलती है?
जब आप ऑनलाइन रिपोर्ट चेक करेंगे, तो आपको मुख्य रूप से दो तरह के फंड का पैसा दिखेगा:
टाइड फंड (Tied Fund): यह पैसा सिर्फ उसी काम में खर्च हो सकता है जिसके लिए सरकार ने भेजा है। जैसे— नल-जल योजना की मरम्मत, स्वच्छता अभियान, या सोलर लाइट लगाना। इसे मुखिया जी अपनी मर्जी से किसी और काम में नहीं लगा सकते।
अनटाइड फंड (Untied Fund): इस फंड का इस्तेमाल पंचायत अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकती है। जैसे— गांव की पीसीसी (PCC) ढलाई, नाली निर्माण, या पंचायत भवन की पुताई। वार्ड सदस्य और मुखिया मिलकर ग्राम सभा में तय करते हैं कि यह पैसा कहाँ खर्च होगा।
eGramSwaraj पोर्टल: जरूरी जानकारी (Quick-Info Table)
| जानकारी (Details) | विवरण (Information) |
| पोर्टल का नाम | eGramSwaraj (ई-ग्राम स्वराज) |
| कौन चेक कर सकता है? | भारत का कोई भी नागरिक (Public Domain) |
| लॉगिन या पासवर्ड चाहिए? | नहीं, बिना किसी आईडी-पासवर्ड के चेक कर सकते हैं। |
| क्या-क्या देख सकते हैं? | पंचायत का Action Plan, स्वीकृत काम और खर्च की गई राशि। |
| मोबाइल ऐप उपलब्ध है? | हाँ (Google Play Store पर उपलब्ध) |
| ऑफिशियल वेबसाइट | egramswaraj.gov.in |
मुखिया और पंचायत का ऑनलाइन फंड कैसे चेक करें? (Step-by-Step Guide)
अपने पंचायत की रिपोर्ट निकालने के लिए आपको किसी कैफे जाने की जरूरत नहीं है। बस अपना स्मार्टफोन उठाइए और इन आसान स्टेप्स को फॉलो कीजिए:
स्टेप 1: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं
सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउजर (जैसे Google Chrome) में egramswaraj.gov.in टाइप करें और वेबसाइट खोलें।
स्टेप 2: Reports (रिपोर्ट्स) सेक्शन खोजें
वेबसाइट के होमपेज पर नीचे की तरफ स्क्रॉल करें। वहां आपको 'Reports' लिखा हुआ एक बड़ा सा ऑप्शन दिखेगा। उसमें कई सारे विकल्प होंगे, आपको 'Planning' वाले ऑप्शन पर क्लिक करना है।
स्टेप 3: Approved Action Plan चुनें
प्लानिंग पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुलेगा। वहां आपको 'Approved Action Plan' (स्वीकृत कार्य योजना) का विकल्प दिखेगा। इसी पर क्लिक करें। (यहीं से आपको पता चलेगा कि आपके गांव में कौन सा काम पास हुआ है)।
स्टेप 4: साल (Financial Year) चुनें
अब आपसे पूछा जाएगा कि आप किस साल का रिकॉर्ड देखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप 2023-24 या 2024-25 का काम देखना चाहते हैं, तो ड्रॉपडाउन लिस्ट से उस Financial Year को चुनें।
स्टेप 5: अपना राज्य और जिला चुनें (State & District)
साल चुनने के बाद, नीचे 'State' में 'Bihar' (बिहार) सेलेक्ट करें। इसके बाद आपके सामने पंचायत के स्तर चुनने का ऑप्शन आएगा:
Zilla Parishad (जिला परिषद): अपने जिले का नाम चुनें (जैसे- पटना, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर आदि)।
Panchayat Samiti (पंचायत समिति): अपने ब्लॉक (प्रखंड) का नाम चुनें।
Gram Panchayat (ग्राम पंचायत): अपने पंचायत का नाम चुनें।
स्टेप 6: Get Report पर क्लिक करें
सारी जानकारी सही-सही भरने के बाद अंत में 'Get Report' (या Submit) बटन पर क्लिक करें।
स्टेप 7: लिस्ट को कैसे पढ़ें? (Very Important)
रिपोर्ट खुलते ही आपके सामने एक लंबा-चौड़ा टेबल आ जाएगा। इसमें मुख्य रूप से आपको ये चीजें देखनी हैं:
Activity Description: काम का नाम (जैसे— वार्ड नंबर 4 में रामू के घर से स्कूल तक पीसीसी निर्माण)।
Total Cost: उस काम के लिए कितना पैसा (लाख रुपये में) पास हुआ है।
Fund Allocated: पैसा किस फंड से आया है (15वां वित्त आयोग या कोई और)।
अगर लिस्ट में लिखा है कि आपके मोहल्ले की नाली बन चुकी है और पैसा निकल चुका है, जबकि असलियत में वहां कीचड़ पसरा है, तो समझ जाइए कि पंचायत में बड़ा खेल हुआ है।
कागज पर काम और जमीन पर घोटाला दिखे, तो क्या करें?
अगर आपने लिस्ट चेक की और आपको पक्का सबूत मिल गया कि मुखिया जी या पंचायत सचिव ने बिना काम कराए फंड निकाल लिया है, तो चुप मत बैठिए। आप इन तरीकों से एक्शन ले सकते हैं:
RTI (सूचना का अधिकार) लगाएं: अपने ब्लॉक के BDO (Block Development Officer) या पंचायत सचिव को एक साधारण सा RTI आवेदन लिखें। उनसे पूछें कि फलां काम जो eGramSwaraj पर पूरा (Completed) दिख रहा है, उसका मस्टर रोल (मजदूरों की हाजिरी) और बिल वाउचर की कॉपी दें। RTI का नाम सुनते ही भ्रष्ट अधिकारियों के पसीने छूट जाते हैं।
DPRO या DM से शिकायत करें: आप सीधे जिला पंचायती राज पदाधिकारी (DPRO) या अपने जिले के जिलाधिकारी (DM) को सारे सबूत (पोर्टल का स्क्रीनशॉट और जमीन की असली फोटो) के साथ लिखित शिकायत कर सकते हैं। सरकार ने पंचायत घोटालों की जांच के लिए 'लोक प्रहरी' की भी व्यवस्था की है।
सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करें: अगर अधिकारी नहीं सुनते, तो Facebook ग्रुप्स और WhatsApp चैनल्स का इस्तेमाल करें। आप में से कई लोग न्यूज़ पोस्ट करते हैं और रोज 150 से 200 लोग उसे पढ़ते हैं। पोर्टल से निकाला गया डेटा और गांव की असली तस्वीर को एक साथ जोड़कर Facebook पर डालें और स्थानीय नेताओं व न्यूज़ चैनल्स को टैग करें। जब बात पब्लिक डोमेन में आती है, तो प्रशासन को मजबूर होकर एक्शन लेना पड़ता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. क्या eGramSwaraj पोर्टल इस्तेमाल करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
बिल्कुल नहीं। यह भारत सरकार का फ्री पब्लिक पोर्टल है। कोई भी नागरिक दिन या रात किसी भी समय मुफ्त में पंचायत का रिकॉर्ड चेक कर सकता है।
2. अगर मेरी पंचायत का कोई डेटा पोर्टल पर नहीं दिख रहा है, तो इसका क्या मतलब है?
अगर 'No Data Found' आ रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके पंचायत सचिव (Panchayat Sevak) ने अब तक इस साल का एक्शन प्लान ऑनलाइन अपलोड (Update) नहीं किया है। आप ब्लॉक में जाकर इसकी शिकायत कर सकते हैं कि नियम के बावजूद डेटा ऑनलाइन क्यों नहीं है।
3. क्या मैं वार्ड सदस्य (Ward Member) का अलग से फंड चेक कर सकता हूँ?
अलग से सिर्फ 'वार्ड सदस्य' के नाम का कोई सेक्शन नहीं होता। सारे काम ग्राम पंचायत के एक्शन प्लान में ही जुड़े होते हैं। आपको लिस्ट में 'Activity Description' पढ़ना होगा, वहां साफ लिखा होता है कि यह काम किस वार्ड नंबर में होना है। उसी से पता चल जाएगा कि आपके वार्ड का पैसा कहाँ गया।
4. क्या मैं मोबाइल ऐप से भी यह जानकारी निकाल सकता हूँ?
हाँ, आप Google Play Store से 'eGramSwaraj' का ऑफिशियल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप का इंटरफेस वेबसाइट से ज्यादा आसान है और उसमें तुरंत पंचायत का नाम डालकर रिपोर्ट देखी जा सकती है।
5. मैं कितने साल पुराना रिकॉर्ड इस पोर्टल पर देख सकता हूँ?
आमतौर पर आप इस पोर्टल पर साल 2015-16 के बाद से लेकर अब तक (वर्तमान वित्तीय वर्ष) का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकते हैं। पुराने सालों के काम में हुए घोटाले भी आप आसानी से पकड़ सकते हैं।
जागरूक बनिए, अपना हक़ मांगिए
बिहार का विकास सिर्फ पटना में बड़े-बड़े पुल या इमारतें बनाने से नहीं होगा। असली विकास तब होगा जब हमारे गांवों की पंचायतें ईमानदारी से काम करेंगी। सरकार हर साल करोड़ों रुपये सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में भेज रही है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण आम जनता सवाल नहीं पूछ पाती।
eGramSwaraj पोर्टल आपके हाथ में एक डिजिटल हथियार है। आज ही अपने मोबाइल पर इसे खोलिए और चेक कीजिए कि आपके गांव के नाम पर कितना पैसा आया है। अगर आपको यह जानकारी सही और काम की लगी हो, तो इस आर्टिकल का लिंक अपने गांव के WhatsApp ग्रुप और Facebook पेज पर जरूर शेयर करें। लोगों को जागरूक करें, क्योंकि जब जनता सवाल पूछना शुरू करती है, तो बड़े-बड़ों को जवाब देना पड़ता है।
अगर पोर्टल इस्तेमाल करने में आपको कोई दिक्कत आ रही है या आपका कोई और सवाल है, तो नीचे कमेंट में जरूर बताएं। मैं एक पत्रकार के नाते आपकी पूरी मदद करने की कोशिश करूंगा।
