बिहार में 1830 करोड़ के हिसाब पर घमासान, मुखिया महासंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में 1830 करोड़ रुपये की राशि को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों और पंचायती राज विभाग के बीच सवाल उठने लगे हैं। 1830 करोड़ रुपये के हिसाब को सार्वजनिक करने की मांग बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने की है। महासंघ का कहना है कि पंचायतों से जुड़ी राशि के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
शनिवार को पटना में पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अध्यक्षों की बैठक हुई। इसमें छठे वित्त आयोग की राशि के साथ पंचायतों की कई अन्य समस्याओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विभाग और पंचायतों के बीच समन्वय जरूरी है।
1830 करोड़ रुपये के हिसाब की क्यों उठी मांग?
बैठक में छठे वित्त आयोग के तहत मिली करीब 1830 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मुखिया महासंघ ने मांग की कि इस राशि के आवंटन और खर्च से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
महासंघ के नेताओं का कहना है कि पंचायतों से संबंधित वित्तीय मामलों में स्पष्टता रहने से प्रतिनिधियों और आम लोगों दोनों को योजनाओं की स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
मुखिया महासंघ अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने पंचायतों से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता की जरूरत बताई। पंच-सरपंच संघ अध्यक्ष अमोद कुमार निराला और प्रमुख संघ की कार्यकारी अध्यक्ष जयमाला कुमारी पासवान भी बैठक में मौजूद रहीं।
बिहार का पंचायती राज विभाग पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के संचालन से जुड़ा है। हाल के दिनों में विभाग की ओर से पंचायत सरकार भवन, सोलर स्ट्रीट लाइट और वित्त आयोग की योजनाओं की समीक्षा भी की गई है।
किन योजनाओं और मामलों पर उठे सवाल?
बैठक में सिर्फ 1830 करोड़ रुपये के हिसाब की मांग ही नहीं उठी। पंचायत प्रतिनिधियों ने कई योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सवाल रखे।
इनमें मुख्य रूप से ये मुद्दे शामिल रहे:
- खराब पड़ी सोलर लाइट का मामला
- पंचायत सरकार भवनों के निर्माण और उपयोग का मुद्दा
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना
- पंचायत सचिवों के स्थानांतरण से जुड़े सवाल
- जिला परिषद से जुड़े वित्तीय मामले
- पंचायतों से संबंधित राशि के उपयोग में पारदर्शिता
महासंघ का आरोप है कि पंचायती राज विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी आ रही है। हालांकि यह महासंघ की ओर से लगाया गया आरोप है और विभाग का पक्ष अलग हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि विभाग पहले भी पंचायत सचिवों के स्थानांतरण और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को निर्देश दे चुका है। सितंबर में मंत्री दीपक प्रकाश ने पंचायत सचिवों के तबादले में कथित लापरवाही के मामले में कुछ अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी दी थी।
पंचायत प्रतिनिधियों ने क्या कहा?
मुखिया महासंघ के अनुसार पंचायत प्रतिनिधि सरकार की पंचायत स्तर की योजनाओं को लागू करने में सहयोग के लिए तैयार हैं। महासंघ ने कहा कि सेवा संकल्प एवं कायाकल्प जैसे अभियानों को सफल बनाने में प्रतिनिधि अपनी भूमिका निभाएंगे।
लेकिन संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों के अधिकार और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि पंचायतों के लिए जारी राशि के उपयोग की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आती है तो योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही दोनों बेहतर हो सकती हैं।
विभाग की ओर से पहले भी वित्त आयोग की राशि के खर्च को लेकर पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं। जुलाई में विभाग ने एक प्रतिशत से कम राशि खर्च करने वाली पंचायतों के मुखिया और पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
हिसाब सार्वजनिक नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
मुखिया महासंघ ने कहा है कि यदि 1830 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन करेगा।
महासंघ ने आंदोलन के दौरान ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम आयोजित करने की चेतावनी भी दी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संगठन की ओर से आंदोलन की अंतिम तारीख और विस्तृत कार्यक्रम कब घोषित किया जाएगा। आगे की स्थिति विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बातचीत पर निर्भर करेगी।
पंचायत सरकार भवन और सोलर लाइट भी चर्चा में
पंचायत सरकार भवन और सोलर स्ट्रीट लाइट योजना भी बैठक में चर्चा का हिस्सा रही। पंचायती राज विभाग की ओर से हाल में पंचायत सरकार भवनों को गांवों में सरकारी सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। बांका में मंत्री दीपक प्रकाश ने भी पंचायत सरकार भवनों के निर्माण और लंबित योजनाओं की समीक्षा की थी।
ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से इन योजनाओं को लेकर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
असंगठित कामगारों के मुद्दे पर भी आंदोलन का ऐलान
इसी बीच पटना में कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने असंगठित कामगारों के अधिकारों को लेकर आंदोलन शुरू करने की बात कही है। शनिवार को सदाकत आश्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के साथ प्रेस वार्ता में उन्होंने श्रमिकों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाए।
उदित राज ने मनरेगा और नई रोजगार व्यवस्था की तुलना करते हुए दावा किया कि मनरेगा में रोजगार कानूनी अधिकार था, जबकि नई व्यवस्था में वह अधिकार समाप्त हो गया है। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि या सरकार की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
इस तरह बिहार में एक तरफ पंचायत प्रतिनिधि वित्तीय पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असंगठित कामगारों के मुद्दे पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
