भागलपुर में गंगा का कहर! देखते ही देखते नदी में समा गए 100 साल पुराने मंदिर
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राघोपुर में गंगा कटाव ने मचाई भारी तबाही
भागलपुर गंगा कटाव ने राघोपुर इलाके में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। भागलपुर गंगा कटाव के कारण करीब 100 साल पुराने चैती दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर देखते ही देखते गंगा की तेज धार में समा गए। वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहे इन मंदिरों के नदी में विलीन होने से ग्रामीणों में चिंता और दहशत का माहौल है।
मंदिरों के गंगा में समाने का मंजर इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। तेज कटाव के बीच जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में खिसका और मंदिर भी उसके साथ गंगा की धार में समा गए।
जहां कभी मंदिरों में पूजा और श्रद्धालुओं की आवाजाही होती थी, वहां अब गंगा की तेज धारा दिखाई दे रही है। यह घटना इलाके में लगातार बढ़ रहे कटाव की गंभीरता को सामने लाती है।
24 अगस्त से लगातार जारी है कटाव
राघोपुर में गंगा का कटाव 24 अगस्त से लगातार जारी बताया जा रहा है। कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि नदी किनारे स्थित जमीन तेजी से गंगा में समा रही है।
सबसे पहले राघोपुर-काजीकोरैया बांध कटाव की चपेट में आया। तेज धार के कारण बांध ध्वस्त हो गया। इसके बाद भी नदी का कटाव थमा नहीं और आसपास के इलाकों में खतरा लगातार बढ़ता गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, पहले मार्जिनल जमींदारी बांध प्रभावित हुआ और इसके बाद मुख्य बांध भी कटाव की जद में आ गया। अब करीब एक सदी पुराने दो मंदिरों के नदी में समा जाने से स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धार लगातार जमीन को काट रही है। अगर कटाव की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में आसपास के दूसरे इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
मंदिरों के बाद पुरानी रेलवे लाइन पर खतरा
गंगा के कटाव का अगला बड़ा खतरा अब पुरानी रेलवे लाइन पर मंडरा रहा है। जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन से करीब 500 मीटर के इलाके में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
कई स्थानों पर गंगा की तेज धार लगातार जमीन को काट रही है। ऐसे में अगर कटाव की रफ्तार कम नहीं हुई तो पुरानी रेलवे लाइन भी इसकी चपेट में आ सकती है।
रेलवे लाइन के आसपास खतरा बढ़ने के कारण प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। सुरक्षा को देखते हुए ब्रह्म बाबा स्थान से महादेवपुर घाट तक रेलवे लाइन के आसपास के क्षेत्रों को खाली कराया गया है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लगातार हो रहा भू-कटाव सिर्फ धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब बुनियादी ढांचे और आबादी के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी, संवेदनशील इलाकों पर नजर
राघोपुर में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर निगरानी बनाए हुए है। संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों को खाली कराने की कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि कटाव बढ़ने की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मौजूदगी से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, गंगा की तेज धार के सामने कटाव को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
100 साल पुराने मंदिरों का डूबना बड़ी चेतावनी
राघोपुर में चैती दुर्गा और हनुमान मंदिर का गंगा में समाना सिर्फ दो पुराने धार्मिक स्थलों के खत्म होने की घटना नहीं है। यह गंगा किनारे तेजी से बढ़ रहे भू-कटाव की गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है।
इन मंदिरों से स्थानीय लोगों की लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक आस्था जुड़ी हुई थी। अचानक नदी की धार में इनके समा जाने से ग्रामीणों के बीच भावनात्मक चिंता भी देखने को मिल रही है।
वहीं, बांध के बाद मंदिरों और अब रेलवे लाइन के आसपास बढ़ता खतरा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि कटाव को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
आबादी की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
गंगा का जलस्तर, नदी की धार और किनारे का भूगोल लगातार बदलने की स्थिति में कटाव प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा बन गई है।
राघोपुर में जिस तेजी से जमीन नदी में समा रही है, उससे ग्रामीणों के बीच भविष्य को लेकर आशंका बढ़ी है। रेलवे लाइन के आसपास के क्षेत्रों को खाली कराने के बाद अब प्रभावित आबादी की सुरक्षा और संभावित विस्थापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और स्थिति पर नजर बनाए रखना है। दूसरी ओर, ग्रामीण चाहते हैं कि गंगा के कटाव को रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी उपाय किए जाएं।
राघोपुर में दो ऐतिहासिक मंदिरों का कुछ ही समय में गंगा में समा जाना इलाके के लिए बेहद चिंताजनक घटना है। अब चुनौती सिर्फ कटाव से जमीन बचाने की नहीं, बल्कि रेलवे लाइन, आसपास के इलाकों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।
