बिहार में दो छात्राओं ने रचाई समलैंगिक शादी! घर से भागने के बाद मंदिर पहुंचीं

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

बिहार में दो छात्राओं की शादी का मामला सामने आया है। समलैंगिक विवाह का दावा करने वाली दोनों छात्राएं पटना से घर छोड़कर खगड़िया पहुंचीं और एक मंदिर में शादी करने की बात पुलिस को बताई। समलैंगिक विवाह के इस मामले में दोनों अलग-अलग धर्मों से बताई जा रही हैं। दोनों ने पुलिस के सामने भी एक-दूसरे से अलग होने से इनकार किया।

दोनों छात्राएं पटना के अदालतगंज इलाके की रहने वाली और एक-दूसरे की पड़ोसी बताई जा रही हैं। करीब तीन साल की दोस्ती के बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। इसके बाद 7 अगस्त को दोनों घर से निकल गईं।

घर से निकलकर खगड़िया पहुंचीं दोनों छात्राएं

जानकारी के अनुसार, दोनों छात्राओं के अचानक घर से गायब होने के बाद परिजनों ने पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की।

पुलिस की टीम ने महिला पुलिस पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में कार्रवाई की। टीम ने दोनों को खगड़िया स्टेशन के पास से बरामद किया और फिर पटना लेकर आई।

पुलिस के मुताबिक, दोनों के पास करीब 3,500 रुपये थे। दोनों पटना से निकलकर खगड़िया पहुंचीं। वहां उन्होंने एक मंदिर में शादी करने का दावा किया और इसके बाद एक होटल में ठहरने की बात सामने आई।

पुलिस के सामने भी अलग होने से किया इनकार

पटना लौटने के बाद पुलिस और परिजनों ने दोनों से बातचीत की। हालांकि, दोनों छात्राओं ने एक-दूसरे से अलग होने से इनकार कर दिया।

दोनों ने अपने-अपने परिजनों के साथ जाने से भी मना किया। पुलिस के अनुसार, छात्राओं ने बताया कि वे अपने रिश्ते को शादी का रूप देना चाहती थीं। इसी वजह से उन्होंने घर छोड़कर साथ जाने का फैसला किया।

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोनों की उम्र समान नहीं है। पुलिस के अनुसार, एक छात्रा बालिग है, जबकि दूसरी के नाबालिग होने की बात सामने आई है।

एक छात्रा नाबालिग, कोर्ट ने भेजा रिमांड होम

कोतवाली थाने के थानेदार अजय कुमार के अनुसार, दोनों को अदालत के सामने पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद नाबालिग छात्रा को रिमांड होम भेज दिया गया।

वहीं, बालिग छात्रा को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी जाने की अनुमति दी गई है। इस तरह मामले में अदालत की भूमिका उम्र और कानूनी स्थिति के आधार पर महत्वपूर्ण हो गई है।

बताया जा रहा है कि एक छात्रा 10वीं और दूसरी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा के पिता सीआईडी में कार्यरत बताए जा रहे हैं।

दोनों छात्राओं के अलग-अलग धर्मों से होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की कार्रवाई फिलहाल मुख्य रूप से उनकी उम्र, बरामदगी और अदालत के निर्देशों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

तीन साल की दोस्ती के बाद लिया साथ रहने का फैसला

पुलिस के सामने दोनों छात्राओं ने अपने संबंध को लेकर अपनी इच्छा स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से एक-दूसरे को जानती हैं और करीब तीन साल की दोस्ती के बाद साथ रहने का निर्णय लिया।

दोनों के परिवारों के लिए यह मामला अचानक सामने आया। घर से बिना बताए निकलने के बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई।

मामले ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा जरूर पैदा की है, लेकिन दोनों में से एक के नाबालिग होने के कारण इसे केवल व्यक्तिगत रिश्ते के तौर पर नहीं देखा जा सकता। नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून और अदालत के निर्देश अहम होते हैं।

बाल गृह के बच्चों के लिए भी बड़ा बदलाव

इसी बीच बिहार के समाज कल्याण विभाग से जुड़ी एक अलग खबर भी सामने आई है। राज्य के बाल गृहों में रहने वाले बच्चों को अस्पताल या न्यायालय ले जाने के लिए अब चारपहिया वाहन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

अब तक कई जगह बच्चों को ऑटो, रिक्शा या दूसरे उपलब्ध वाहनों से ले जाया जाता था। नई व्यवस्था के तहत राज्य के 40 अलग-अलग बाल गृहों को एक-एक चारपहिया वाहन उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है।

समाज कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सुशील कुमार के अनुसार, इन वाहनों की सुविधा आउटसोर्सिंग के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। सेवा सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे उपलब्ध रखने की योजना है।

एक वाहन पर हर महीने 75 हजार रुपये खर्च

विभाग के अनुसार, प्रत्येक वाहन के लिए हर महीने 75 हजार रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था को फिलहाल एक वर्ष के लिए मंजूरी दी गई है।

40 बाल गृहों के लिए प्रस्तावित इस व्यवस्था पर सरकार करीब 3.60 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उद्देश्य बच्चों को अस्पताल, न्यायालय और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की सुविधा देना है।

बिहार में दो छात्राओं के मामले और बाल गृहों के लिए परिवहन सुविधा की यह दोनों खबरें अलग-अलग विषयों से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों में प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया की भूमिका अहम है। छात्राओं के मामले में अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी, जबकि बाल गृहों के लिए वाहन व्यवस्था लागू होने के बाद बच्चों के आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1