शराबबंदी पर घमासान तेज, नीरज कुमार का शराब कंपनियों पर बड़ा आरोप

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बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। शराबबंदी पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शराब कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बिहार की शराबबंदी की समीक्षा से जुड़ी रिसर्च में शराब कंपनियों की भूमिका रही है और इस मामले में संबंधित कंपनियों को लीगल नोटिस भेजा जाएगा। यह बयान उस रिपोर्ट को लेकर चल रही बहस के बीच आया है, जिसमें शराबबंदी की सामाजिक और आर्थिक प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए हैं।

नीरज कुमार ने 99 पन्नों की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें बिहार के विकास से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उन्होंने रिसर्च की पद्धति और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की।

99 पन्नों की रिपोर्ट पर नीरज कुमार ने उठाए सवाल

जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि शराबबंदी को लेकर सामने आई रिसर्च को लेकर सरकार और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने इस अध्ययन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

नीरज कुमार ने यह भी सवाल उठाया कि सर्वे किस तरीके से किया गया और इसमें किन लोगों तथा संस्थाओं को शामिल किया गया। उन्होंने रिपोर्ट में शराबबंदी के कारण महिला अपराध बढ़ने और राज्य के खजाने पर असर पड़ने जैसे दावों को भी खारिज किया।

हालिया मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक NCAER से जुड़ी एक रिसर्च में बिहार की शराबबंदी की प्रभावशीलता, महिलाओं के खिलाफ अपराध और राज्य के राजस्व पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में शराबबंदी हटाने और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की सिफारिश का भी उल्लेख है।

शराब कंपनियों को लीगल नोटिस भेजने की बात

प्रेस वार्ता में नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि शराब कंपनियों ने बिहार में शराबबंदी की समीक्षा से जुड़े सर्वे में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, किन-किन कंपनियों को नोटिस भेजा जाएगा और नोटिस में किन कानूनी आधारों का उल्लेख होगा, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

यह आरोप राजनीतिक बहस के बीच आया है और संबंधित कंपनियों का पक्ष इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को फिलहाल नीरज कुमार के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

महिला अपराध और राजस्व के दावे पर क्या बोले?

नीरज कुमार ने शराबबंदी की आलोचना में इस्तेमाल किए जा रहे दो प्रमुख तर्कों—महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ने और सरकारी राजस्व घटने—को भ्रामक बताया।

उन्होंने कहा कि शराब की बिक्री जारी रहने के दौर में भी बिहार का बजट आज की तरह बड़ा नहीं था। उनका तर्क था कि किसी कॉर्पोरेट समूह को राज्य की आर्थिक दिशा तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

दूसरी ओर, हालिया NCAER अध्ययन की मीडिया रिपोर्टों में शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ने और महिलाओं के खिलाफ अपराध में अपेक्षित कमी नहीं आने की बात कही गई है।

इस तरह दोनों पक्षों के दावों के बीच शराबबंदी की आर्थिक और सामाजिक प्रभावशीलता को लेकर बहस जारी है।

JDU ने गिनाए शराबबंदी के सामाजिक फायदे

नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू शराबबंदी के सकारात्मक प्रभावों का भी जिक्र किया। उन्होंने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार में दहेज और महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कमी आई है।

उन्होंने जीविका, एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट और चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी से जुड़े सर्वे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन सर्वे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने शराबबंदी का समर्थन किया और हिंसा में कमी दर्ज होने की बात सामने आई।

महिलाओं के बीच शराबबंदी के समर्थन से जुड़े आंकड़े पहले भी सामने आते रहे हैं। 2023 के एक राज्यव्यापी सर्वे के हवाले से 99 प्रतिशत महिलाओं और 92 प्रतिशत पुरुषों के शराबबंदी के समर्थन की बात कही गई थी।

हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों के निष्कर्षों और उनके तरीकों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी एक आंकड़े के आधार पर पूरी नीति का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।

नीरज कुमार बोले- शराबबंदी समाज के हर तबके का फैसला

जेडीयू प्रवक्ता ने शराबबंदी को केवल राजनीतिक फैसला मानने के बजाय इसे समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ा मुद्दा बताया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नीतीश कुमार के शराबबंदी कदम की सराहना किए जाने का भी उल्लेख किया और इसे नशामुक्त युवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

नीरज कुमार का कहना था कि बिहार में शराबबंदी का मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी चर्चा का विषय बना है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और झारखंड की सरकारों ने ड्रोन संचालन और शराबबंदी से जुड़े अनुभवों को लेकर बिहार के मद्य निषेध विभाग से संपर्क किया है।

जीतन राम मांझी के गुजरात मॉडल पर भी जवाब

प्रेस वार्ता के दौरान जीतन राम मांझी के गुजरात मॉडल की बात पर भी नीरज कुमार ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मॉडल की बात कर रही है और बिहार का मॉडल बेहतर है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में शराबबंदी की समीक्षा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है।

इससे पहले भी शराबबंदी को लेकर समीक्षा की मांग उठती रही है, जबकि जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कानून को खत्म करने का सवाल नहीं है।

बिहार में शराबबंदी पर आगे क्या होगा?

बिहार में शराबबंदी अप्रैल 2016 से लागू है। करीब एक दशक बाद इसके सामाजिक प्रभाव, अपराध, राजस्व और अवैध शराब की समस्या को लेकर फिर से व्यापक बहस शुरू हो गई है।

एक तरफ सरकार और जेडीयू इसके सामाजिक लाभों और महिलाओं के समर्थन का हवाला दे रहे हैं, वहीं हालिया रिसर्च शराबबंदी की आर्थिक और अपराध नियंत्रण से जुड़ी प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही है।

अब नीरज कुमार द्वारा रिपोर्ट पर श्वेत पत्र की मांग और शराब कंपनियों को लीगल नोटिस भेजने की बात के बाद यह विवाद और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया और सरकार की अगली कार्रवाई इस बहस को नई दिशा दे सकती है।

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