बिहार में रात 9:55 के बाद DJ बजाया तो पहुंच जाएगी पुलिस, सख्त आदेश
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में DJ लाउडस्पीकर नियम अब और सख्त होने जा रहे हैं। DJ लाउडस्पीकर नियम के तहत रात में तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाने और वाहनों में प्रेशर हॉर्न इस्तेमाल करने वालों पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। पटना हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। खास तौर पर रात में डीजे, तेज लाउडस्पीकर और प्रेशर हॉर्न को लेकर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पटना रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने विशेष बैठक कर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
रात 9:55 के बाद DJ और लाउडस्पीकर पर रोक
पटना हाई कोर्ट ने डीजे संचालकों, लाउडस्पीकर मालिकों, मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल संचालकों को ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है।
निर्देश के अनुसार रात 9:55 बजे के बाद किसी भी तरह का साउंड सिस्टम नहीं बजाया जाना चाहिए। यानी शादी, पार्टी, धार्मिक कार्यक्रम या किसी अन्य आयोजन में निर्धारित समय के बाद डीजे या लाउडस्पीकर चलाने पर कार्रवाई हो सकती है।
दिन के समय भी साउंड सिस्टम की आवाज निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य तेज आवाज से आम लोगों को होने वाली परेशानी और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
हालांकि, स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमों के क्रियान्वयन और कार्रवाई की प्रक्रिया मौके की परिस्थितियों के अनुसार हो सकती है।
हाई कोर्ट ने किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर की। कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, अनुमंडल पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों को नियमों के पालन पर ध्यान देने को कहा है।
सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आदेश की प्रति संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को तत्काल भेजी जाएगी।
इससे संकेत है कि अब जिले स्तर पर भी ध्वनि प्रदूषण को लेकर कार्रवाई तेज हो सकती है।
प्रेशर हॉर्न बजाया तो कट सकता है चालान
सिर्फ डीजे और लाउडस्पीकर ही नहीं, वाहनों में इस्तेमाल होने वाले प्रेशर हॉर्न पर भी हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
पुलिस को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का चालान काटने का निर्देश दिया गया है।
प्रेशर हॉर्न से निकलने वाली तेज आवाज खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों, अस्पतालों और स्कूलों के आसपास परेशानी का कारण बन सकती है। इसी वजह से इसके इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
सुनवाई के दौरान कटिहार जिले के पोठिया का उदाहरण भी सामने आया। जानकारी के मुताबिक, वहां एक सप्ताह के भीतर प्रेशर हॉर्न के मामलों में करीब 1.10 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
यह आंकड़ा बताता है कि नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन अब केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता।
अस्पताल और स्कूल के आसपास 100 मीटर साइलेंस जोन
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हाई कोर्ट ने अस्पतालों और स्कूलों के आसपास विशेष व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है।
इन संस्थानों के 100 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन के तौर पर लागू करने की बात कही गई है। इस क्षेत्र में डीजे और अनावश्यक हॉर्न के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
अस्पतालों में मरीजों के इलाज और आराम के लिए शांत वातावरण जरूरी होता है। वहीं स्कूलों में तेज आवाज पढ़ाई और परीक्षा जैसी गतिविधियों में बाधा बन सकती है।
इसी वजह से संबंधित क्षेत्रों में ‘नो हॉर्न, नो लाउडस्पीकर’ जैसे साइनबोर्ड लगाने का निर्देश भी दिया गया है।
बिहार में अब प्रशासन की निगरानी बढ़ेगी
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रशासन और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें।
शादी समारोहों और सार्वजनिक आयोजनों में डीजे के इस्तेमाल को लेकर पहले से शिकायतें सामने आती रही हैं। रात में तेज आवाज से आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी होती है।
नए निर्देशों के बाद आयोजकों और साउंड सिस्टम संचालकों को समय और आवाज की सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा बदलाव रात के समय तेज आवाज वाले कार्यक्रमों को लेकर दिखाई दे सकता है। निर्धारित समय के बाद डीजे या लाउडस्पीकर चलाने पर पुलिस हस्तक्षेप कर सकती है।
इसी तरह वाहन चालकों को प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल से बचना होगा। खासकर अस्पताल और स्कूल के आसपास हॉर्न बजाने को लेकर प्रशासन अधिक सख्ती बरत सकता है।
ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर शांत और सुरक्षित वातावरण बनाए रखना भी है।
कुल मिलाकर, पटना हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बिहार में डीजे, लाउडस्पीकर और प्रेशर हॉर्न को लेकर प्रशासन का रुख सख्त होता दिख रहा है। अब देखना होगा कि जिलों में इन नियमों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
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