समस्तीपुर में बेटियों की उड़ान, गुंजन चौधरी की मेहनत लाई रंग


 

समस्तीपुर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में समस्तीपुर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के दौरान ग्रामीण बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया। इस समस्तीपुर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों ने कई पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। खास बात यह रही कि कई बेटियां नंगे पांव दौड़ते हुए भी बड़े स्कूलों के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ने में सफल रहीं।

यह सफलता सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष और हौसले की मिसाल बन गई है।

भव्य उद्घाटन, प्रशासनिक मौजूदगी

23वीं जिला स्कूल एवं ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 का भव्य उद्घाटन जिला प्रशासन की मौजूदगी में हुआ।

इस अवसर पर डीएम रोशन कुशवाहा, मेयर अनीता राम और एसडीएम दिलीप कुमार ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अधिकारियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

प्रतियोगिता में जिले भर से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने भाग लिया।

सुल्तानपुर घटहो पंचायत का दबदबा

दलसिंहसराय अनुमंडल के सुल्तानपुर घटहो पंचायत के खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया।

यहां की बेटियों ने सबसे ज्यादा पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

  • चंदारानी और नवीन कुमार ने स्वर्ण पदक जीता
  • अन्नू कुमारी, राशिका कुमारी और चंदा ने रजत पदक हासिल किया
  • नेहा, ब्यूटी और शबनम ने कांस्य पदक अपने नाम किए

इस प्रदर्शन ने पंचायत को जिले में अलग पहचान दिलाई।

नंगे पांव दौड़कर रचा इतिहास

इस प्रतियोगिता की सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि कई खिलाड़ी बिना जूतों के मैदान में उतरे।

सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों ने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। साधारण जीवनशैली और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।

इनकी मेहनत ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए संसाधनों से ज्यादा जुनून जरूरी होता है।

गुंजन चौधरी की पहल बनी ताकत

इस सफलता के पीछे समाजसेवी गुंजन कुमार चौधरी का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने शिव शक्ति क्लब के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया।

उनका कहना है कि गांव के कई बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचान नहीं पाते। सही दिशा और प्रेरणा मिलने पर वे बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

उनकी पहल ने कई बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

निजी स्कूलों को दी कड़ी टक्कर

प्रतियोगिता में निजी स्कूलों के खिलाड़ी भी शामिल थे, जिनके पास बेहतर संसाधन और सुविधाएं थीं।

इसके बावजूद ग्रामीण खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

आगे की तैयारी और लक्ष्य

गुंजन चौधरी ने बताया कि यह सफलता शुरुआत है। आने वाले समय में ये खिलाड़ी और बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।

उनका लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाए।

इसके लिए प्रशिक्षण और संसाधनों को और बेहतर बनाने की योजना बनाई जा रही है।

निष्कर्ष

समस्तीपुर की यह सफलता कहानी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। नंगे पांव दौड़कर पदक जीतने वाली बेटियों ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल छोटी होती है।

यह उपलब्धि न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है।

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