Ayodhya GST Deputy Commissioner Resignation News in Hindi
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक महकमे से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। अयोध्या में तैनात राज्यकर (GST) विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।
इस्तीफा देने के बाद जब उन्होंने अपनी पत्नी से फोन पर बात की, तो खुद को संभाल नहीं पाए और बातचीत के दौरान भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने सिर्फ इतना कहा—
“हां, हैलो… मैंने इस्तीफा दे दिया है। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।”
अंतरात्मा की आवाज पर लिया गया फैसला
प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार यह निर्णय किसी जल्दबाजी या दबाव में नहीं लिया गया, बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि बीते दो दिनों से वे ठीक से सो नहीं पाए थे और मन बेहद व्यथित था।
उनका मानना है कि
“जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए।”
वे जिस सरकार और व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं, उसी नेतृत्व के खिलाफ यदि सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणियां हों और वे चुप रहें, तो यह उनके आत्मसम्मान के खिलाफ है।
पत्नी से बातचीत में छलका दर्द
इस्तीफा देने के बाद पत्नी से बातचीत के दौरान वे भावनात्मक हो गए। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी दो बेटियां यह देखें कि उनका पिता सही और गलत के बीच खड़े होने से नहीं डरता।
उनके अनुसार, यह फैसला किसी राजनीतिक लाभ या भविष्य की योजना के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह उनकी अंतरात्मा की आवाज पर आधारित है।
राज्यपाल को संबोधित दो पन्नों का इस्तीफा पत्र
प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित करते हुए भेजा है। दो पन्नों के इस पत्र में उन्होंने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए गए बयानों पर कड़ा विरोध जताया है।
पत्र में उन्होंने इन टिप्पणियों को
- अभद्र
- अमर्यादित
- और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ
बताया है।
उनका कहना है कि इस तरह के बयान केवल किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि देश के संविधान, जनादेश और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला हैं।
“यह मेरा राजकीय धर्म है” – इस्तीफे में लिखा
इस्तीफा पत्र में प्रशांत कुमार सिंह ने स्पष्ट लिखा कि एक सरकारी अधिकारी होने के नाते उनका भी एक राजकीय धर्म है।
उनके अनुसार, यह धर्म सिर्फ फाइलें निपटाने या राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि उस नेतृत्व और व्यवस्था के सम्मान की रक्षा करना भी है, जिसके तहत वे कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में भ्रम, तनाव और अस्थिरता को जन्म देता है।
जातिवाद और समाज को बांटने के आरोप
अपने पत्र में प्रशांत कुमार सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के बयानों से समाज में जातिवाद और विभाजन को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने लिखा कि
भारत ने सदियों के संघर्ष के बाद संविधान के जरिए समानता और न्याय का रास्ता चुना है। ऐसे में किसी भी जिम्मेदार धार्मिक या सामाजिक व्यक्ति द्वारा विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस्तीफा स्वीकार होने तक निभाते रहेंगे जिम्मेदारी
प्रशांत कुमार सिंह ने साफ किया है कि जब तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं हो जाता, तब तक वे अपने पद की सभी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते रहेंगे।
उन्होंने राजस्व वृद्धि और विभागीय कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह इस्तीफा पत्र 27 जनवरी 2026 को अयोध्या से जारी किया गया है।
2023 में हुई थी अयोध्या में पोस्टिंग
जानकारी के मुताबिक, प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग वर्ष 2023 में हुई थी। वे राज्यकर विभाग में संभागीय उप आयुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के पद पर कार्यरत थे।
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने संकेत दिया है कि वे भविष्य में सामाजिक कार्यों के जरिए समाज के लिए योगदान देते रहेंगे और अपने निजी संसाधनों से जनसेवा करेंगे।
निष्कर्ष
अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और वैचारिक संदेश भी है। उनका यह कदम आने वाले दिनों में प्रशासनिक सेवा, अभिव्यक्ति और जिम्मेदारी को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।
